“दिल्ली प्रदूषण पर सख्त सुप्रीम कोर्ट: पंजाब–हरियाणा से रिपोर्ट तलब”
नई दिल्ली: दिल्ली–एनसीआर में लगातार बिगड़ती हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को निर्देश दिया है कि वे पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के कई इलाकों में AQI 450 से भी ऊपर जा चुका है, जो बेहद खतरनाक स्तर है। कोर्ट ने यह भी माना कि वर्तमान में लागू GRAP स्टेज-III की पाबंदियां पर्याप्त नहीं हो रही हैं। कई वकीलों ने दलील दी कि हालात को देखते हुए नियमों को तुरंत GRAP स्टेज-IV तक बढ़ाया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अमिकस क्यूरी ने अदालत के सामने एक बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कई किसान जानबूझकर उपग्रह निगरानी के समय से बचकर पराली जला रहे हैं, जिससे वास्तविक आंकड़ों का पता नहीं चल पा रहा है। बताया गया कि यह दावा एक NASA वैज्ञानिक के विश्लेषण और कई मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। इससे यह संदेह गहरा गया है कि सरकारों द्वारा अदालत को दिए जा रहे पराली जलाने के आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं दिखा रहे। अमिकस ने यह भी बताया कि दिल्ली के कई एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बंद पड़े हैं, जिसके कारण समय पर प्रदूषण नियंत्रण कदम नहीं उठाए जा पा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि निगरानी तंत्र दुरुस्त होना बेहद जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई में इन सभी दावों और रिपोर्टों की गहराई से समीक्षा की जाएगी। दिल्ली की हवा लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने के कारण लोगों में चिंता बढ़ रही है और अदालत सरकारों से तेज़ और ठोस कदम उठाने की उम्मीद कर रही है।