भारतीय टीम कैंप से जुड़े ऑस्ट्रेलियाई फॉरवर्ड रयान विलियम्स
ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट त्यागकर बने भारतीय नागरिक, नई शुरुआत की उम्मीद
भारतीय फुटबॉल में एक नया इतिहास रचते हुए ऑस्ट्रेलियाई मूल के फॉरवर्ड रयान विलियम्स अब भारतीय नागरिक बन गए हैं। 32 वर्षीय विलियम्स ने ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट त्यागकर भारतीय नागरिकता ग्रहण की है और अब वे मुख्य कोच खालिद जमील के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय फुटबॉल टीम कैंप से जुड़ गए हैं। यह जानकारी ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने रविवार को दी।
रयान विलियम्स का जन्म ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में हुआ था। उनकी मां मुंबई में जन्मी थीं, जबकि पिता का जन्म इंग्लैंड के केंट में हुआ था। विलियम्स के साथ ही डिफेंडर जय गुप्ता भी कैंप में शामिल हुए हैं। एआईएफएफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए लिखा, “फॉरवर्ड रयान विलियम्स और डिफेंडर जय गुप्ता भारतीय पुरुष सीनियर टीम के कैंप में शामिल हो गए हैं।”
यह कैंप 6 नवंबर से बेंगलुरु में शुरू हुआ, जो आगामी एएफसी एशियन कप क्वालिफायर (बांग्लादेश के खिलाफ, 18 नवंबर) की तैयारी के लिए आयोजित किया गया है। इस हफ्ते एआईएफएफ ने दो विदेशी पृष्ठभूमि वाले खिलाड़ियों — रयान विलियम्स और अबनीत भारती — को कैंप में शामिल कर एक साहसिक कदम उठाया है। इससे भारतीय मूल के विदेशी खिलाड़ियों या ऐसे खिलाड़ियों के लिए रास्ता खुला है जो भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए अपनी विदेशी नागरिकता छोड़ना चाहते हैं।
रयान विलियम्स की नागरिकता ग्रहण करने की औपचारिकता बेंगलुरु एफसी के प्रशिक्षण केंद्र पर सुनिल छेत्री की मौजूदगी में पूरी की गई। इस मौके पर विलियम्स ने सोशल मीडिया पर लिखा, “आज आधिकारिक तौर पर वही बन गया हूं जो दिल से हमेशा महसूस करता था — भारत, अब मैं तुम्हारा हूं।”
रयान विलियम्स इससे पहले इंग्लैंड के क्लब फुलहम और पोर्ट्समाउथ के लिए खेल चुके हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अंडर-20 और अंडर-23 टीमों का प्रतिनिधित्व किया था और 2019 में दक्षिण कोरिया के खिलाफ एक सीनियर फ्रेंडली मैच में भी हिस्सा लिया था।
गौरतलब है कि यह दूसरा मौका है जब किसी विदेशी मूल के खिलाड़ी ने भारतीय नागरिकता लेकर राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने का निर्णय लिया है। इससे पहले जापान में जन्मे अराता इजुमी ने 2012 में भारतीय नागरिकता ली थी और 2013-14 के दौरान भारत के लिए नौ मैच खेले थे।
रयान विलियम्स का भारतीय टीम से जुड़ना न सिर्फ एक खिलाड़ी की नई शुरुआत है, बल्कि भारतीय फुटबॉल के लिए भी एक नए अध्याय का आरंभ माना जा रहा है।