एक महिला और 2,000 पेड़: पर्यावरण के लिए निरंतर प्रयास की कहानी
नोएडा में रहने वाली सुखमनी ढिल्लन, फौजी परिवार से आती हैं। वो कहती हैं देश की रक्षा के लिए फौजी और देश के अंदर की सेवा के लिए आम लोगों को आगे आना होगा। साल 2021 से अबतक हरियाली को बढ़ावा देने के लिए 2,000 से अधिक पेड़-पौधे लगाए हैं। वह सिर्फ पेड़ नहीं लगाती बल्कि उसे बचाती भी हैं।
सेक्टर-78 के सनशाइन हेलिओस अपार्टमेंट्स में रहने वाली ढिल्लन पिछले चार सालों से पेड़-पौधों के बचाव और वृक्षारोपण के काम में लगी हुई हैं। उन्होंने 2021 से अब तक नोएडा के अलग-अलग इलाकों में 1,500 से ज्यादा पेड़ लगाई हैं। उनका मुख्य उद्देश्य है, प्रकृति की रक्षा, जलवायु बदलाव से लड़ना और स्थानीय पर्यावरण को बेहतर बनाना।
ढिल्लन एक रिटायर्ड नेवी अधिकारी की पत्नी हैं। उनके पति भारतीय नौसेना में कमांडर थे। उनके निधन के बाद वह 2015 में पंजाब से नोएडा आई और 2021 में जब बच्चे बड़े हो गए तब से ढिल्लन ने पर्यावरण सेवा को अपना मिशन बना लिया। वह कहती हैं कि “हर पेड़ सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि एक यादगार, एक श्रद्धांजलि और भविष्य की जिम्मेदारी है।” उनके इस कार्य ने ना केवल इलाके को हरा-भरा किया है, बल्कि एयर क्वालिटी सुधारने, गर्मी कम करने और पक्षियों व कीटों को आश्रय देने में भी मदद की है।
कैसे शुरू हुआ यह अभियान
शुरुआत में यह सिर्फ उनका निजी प्रयास था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक सामुदायिक आंदोलन में बदल गया। इस आंदोलन में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने भी भाग लेना शुरू कर दिया। उन्होंने नोएडा के सेक्टर 77, 78, 79 और आसपास के क्षेत्रों में कई बंजर और बेकार जगहों की पहचान कर उन्हें हरियाली में बदला। ढिल्लन बताती हैं कि वह सिर्फ पेड़ लगाकर रुकती नहीं, बल्कि उनकी देखभाल भी करती हैं। पेड़ में सिंचाई, खाद, छंटाई और लगातार निगरानी से वे यह सुनिश्चित करती हैं कि पौधे स्वस्थ रहें और बड़े होकर छाया देने वाले पेड़ बनें। मरे हुए पौधों को हटाकर नए पौधे लगाना भी उनके अभियान का हिस्सा है।
परंपरागत पेड़ों को दे रही हैं प्राथमिकता
ढिल्लन पुराने और छायादार पेड़ को प्राथमिकता देती हैं। जिसमें गुलमोहर, नीम, पीपल, पिलखन जैसे भारतीय परंपरागत वृक्षों को प्राथमिकता देती हैं, जो न केवल छाया देते हैं बल्कि पर्यावरण को भी शुद्ध करते हैं। ये पेड़ सोसाइटी की दीवारों, फूटपाथ और हरित पट्टियों को सुंदर बनाते हैं।
सरकारी सहयोग और आत्मनिर्भरता
बागवानी विभाग ने भी उनके काम में सहयोग किया है। विभाग ने उन्हें ट्री गार्ड (पेड़ों के चारों ओर सुरक्षा कवच) उपलब्ध कराए हैं ताकि पौधों को नुकसान न पहुंचे। हालांकि, अधिकतर खर्च ढिल्लन खुद ही उठाती हैं और जरूरत पड़ने पर अपने स्वर्गीय पति की पेंशन से खर्च करती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने मिशन को रोकने का विचार नहीं किया।
लोगों ने की ढिल्लन को शुक्रिया
सेक्टर-77 के एक निवासी ने बताया कि अब हमारे रास्ते छायादार हो गए हैं। गर्मियों में ठंडी हवा मिलती है और आसपास का वातावरण पूरी तरह बदल गया है। यह सब ढिल्लन की दूरदृष्टि और मेहनत का नतीजा है। उनके कार्यों की सराहना स्थानीय लोगों के साथ-साथ बागवानी विभाग ने भी की है। उनकी प्रेरणा से कई लोग अब हर सप्ताह पौधे लगाकर इस अभियान में शामिल हो रहे हैं।
आगे की योजना
अब ढिल्लन की योजना है कि इस अभियान को नोएडा के दूसरे इलाकों में फैलाया जाए और विद्यालयों के बच्चों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाए। वे चाहती हैं कि बच्चे पेड़ों की अहमियत समझें और छोटी उम्र से ही प्रकृति की सेवा का भाव विकसित करें।
उनका नारा है,
“हरित भारत- स्वच्छ भारत- हमारा भारत”।