रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के ‘सिंध’ बयान पर सियासी विवाद तेज
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का पलटवार—BJP पर लगाया तनाव बढ़ाने का आरोप**
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के हालिया बयान में “सिंध के भारत में वापस आने” की संभावना वाली टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए बीजेपी पर जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का आरोप लगाया है। मामला तेजी से राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
राजनाथ सिंह ने क्या कहा था?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के कथन को याद करते हुए कहा था कि—
-
“सीमाएं बदलती रहती हैं। कौन जानता है, कल सिंध फिर भारत में आ जाए।”
-
उन्होंने सिंध क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का भी उल्लेख किया।
-
राजनाथ सिंह के अनुसार, सिंधु घाटी सभ्यता और भारतीय संस्कृति में सिंध का विशेष स्थान रहा है।
उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का कड़ा जवाब
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी से बातचीत में राजनाथ सिंह के बयान को “निराधार और तनाव बढ़ाने वाला” बताया। उन्होंने कहा—
“अगर RSS कहता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान पहले भारत का हिस्सा थे, तो केवल सिंध की बात क्यों? पूरी तीनों जगहों को सेना भेजकर भारत में मिला लो।”
-
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और उससे जुड़े संगठन जानबूझकर ऐसे बयान देते हैं जो क्षेत्र में तनाव बढ़ाते हैं।
अल्वी ने स्पष्ट कहा कि जनता को ऐसे बयानों से गुमराह करने के बजाय सरकार को गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
“आर्थिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश”—कांग्रेस का आरोप
राशिद अल्वी ने आगे कहा कि देश में
-
बेरोजगारी
-
महंगाई
-
आर्थिक असमानता
-
और विकास से जुड़े बड़े सवाल
मौजूद हैं, लेकिन सरकार इन पर चर्चा करने के बजाय भावनात्मक और विवादास्पद मुद्दों को उछालती रहती है। उनके अनुसार, ऐसे बयान केवल जनता की भावनाओं के साथ खेलने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए दिए जाते हैं।
सिंध क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सिंधु नदी के किनारे बसा सिंध क्षेत्र—
-
सिंधु घाटी सभ्यता का केंद्र माना जाता है।
-
प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और व्यापार का प्रमुख हिस्सा रहा है।
-
1947 के बंटवारे के बाद यह पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में यह उल्लेख किया कि सिंध के मुस्लिम समुदाय में भी सिंधु नदी के पवित्र जल को लेकर गहरी आस्था रही है।
बयान से बढ़ा राजनीतिक तापमान
राजनाथ सिंह के बयान ने जहां एक तरफ ऐतिहासिक संदर्भों को फिर से चर्चा में ला दिया है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और मुद्दों से भटकाने का प्रयास बता रहा है। कुल मिलाकर, “सिंध” को लेकर दिए गए इस बयान ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।