पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए वित्तीय सहायता में 100% वृद्धि लागू
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश के पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen) और उनके आश्रितों के लिए एक बड़ा और राहतभरा फैसला लिया है। रक्षा मंत्रालय (MoD) ने Department of Ex-Servicemen Welfare के अंतर्गत Kendriya Sainik Board द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की वित्तीय सहायता में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू कर दी है। इस फैसले से हजारों पूर्व सैनिकों, विधवाओं और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रमुख योजनाओं की राशि हुई दोगुनी
सरकार ने Penury Grant, Education Grant और Marriage Grant जैसी अहम योजनाओं की सहायता राशि दोगुनी कर दी है। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को सहारा देना है।
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Penury Grant:
पहले 4,000 रुपये प्रतिमाह मिलने वाली यह सहायता अब बढ़ाकर 8,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। यह अनुदान उन पूर्व सैनिकों को दिया जाता है जो पेंशन नहीं लेते हैं, साथ ही 65 वर्ष से अधिक आयु की सैनिक विधवाएं भी इसके दायरे में आती हैं। -
Education Grant:
आश्रित बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाली सहायता राशि 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। यह अनुदान अधिकतम दो बच्चों के लिए मान्य होगा, जिससे सैनिक परिवारों पर शिक्षा का बोझ कुछ कम होगा। -
Marriage Grant:
पूर्व सैनिकों या उनकी बेटियों के विवाह के लिए दी जाने वाली सहायता राशि अब 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1,00,000 रुपये कर दी गई है।
पूर्व सैनिकों के जीवन स्तर में सुधार का लक्ष्य
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सेवा निवृत्ति के बाद आने वाली आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मजबूत सहारा देना है। बढ़ी हुई सहायता से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा और सामाजिक सुरक्षा को भी बल मिलेगा।
Kendriya Sainik Board के माध्यम से मिलेगा लाभ
यह सभी सहायता Kendriya Sainik Board के जरिए प्रदान की जाएगी, जो पहले से ही देशभर में पूर्व सैनिकों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को लागू करता आ रहा है। मंत्रालय के अनुसार, संशोधित राशि तुरंत प्रभाव से लागू होगी।
सरकार की पहल को बताया सम्मान का प्रतीक
पूर्व सैनिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम सरकार की ओर से उन जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
यह फैसला न सिर्फ आर्थिक मदद बढ़ाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि देश अपने सैनिकों और उनके परिवारों के साथ खड़ा है।