ऑस्ट्रेलियाई संसद में बुर्का पहनकर पहुंची महिला सांसद
सदन में आने पर पाबंदी, 7 दिन का निलंबन; विवाद फिर गर्माया
ऑस्ट्रेलिया में बुर्का पर प्रतिबंध की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। मुस्लिम विरोधी बयानबाजी और विवादित कदमों के लिए पहचानी जाने वाली सीनेटर पॉलीन हैनसन ने सोमवार को संसद में बुर्का पहनकर प्रवेश किया, जिसके बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया। अब संसद ने उन पर कड़ा कदम उठाते हुए सात दिनों के लिए सदन में प्रवेश पर रोक लगा दी है।
क्यों किया गया निलंबन?
सीनेट के अनुसार हैनसन का यह कृत्य असम्मानजनक, उकसाने वाला और सदन की गरिमा के खिलाफ था।
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सोमवार को उन्हें पूरे दिन के लिए निलंबित किया गया
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मंगलवार को माफी न मांगने पर निंदा प्रस्ताव पारित किया गया
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दंड के रूप में उन्हें लगातार 7 दिनों तक संसद सत्र से बाहर कर दिया गया
यह हाल के दशकों में किसी सीनेटर के खिलाफ लिए गए सबसे कठोर निर्णय में से एक माना जा रहा है।
हैनसन क्यों पहनकर गईं बुर्का?
71 वर्षीय पॉलीन हैनसन लंबे समय से बुर्का पर राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की मांग करती रही हैं।
इस बार वे बुर्का पहनकर इसलिए संसद पहुंचीं क्योंकि—
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उनके साथी सांसद बुर्का बैन बिल पर चर्चा के लिए तैयार नहीं थे
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उन्होंने इसे अपना विरोध प्रदर्शन बताया
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उनका कहना था कि यदि सार्वजनिक जगहों पर बुर्का प्रतिबंधित होना चाहिए, तो संसद में इस पोशाक को पहनना गलत कैसे हो सकता है?
हैनसन की पार्टी वन नेशन को आव्रजन विरोधी और मुस्लिम विरोधी रुख के लिए जाना जाता है।
“पाखंड है कि मुझे पहनने नहीं दिया” — हैनसन
निलंबन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा—
“संसद में ड्रेस कोड नहीं है, फिर भी मुझे बुर्का पहनने नहीं दिया गया। यह पाखंड है।”
उन्होंने आगे कहा कि उनका फैसला सांसद नहीं, बल्कि 2028 के चुनाव में मतदाता करेंगे।
पहले भी कर चुकी हैं ऐसा विरोध
यह पहली बार नहीं है जब हैनसन बुर्का पहनकर संसद पहुंची हों।
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2017 में उन्होंने ठीक ऐसा ही प्रदर्शन किया था
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उस समय उन्हें सजा नहीं मिली थी
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लेकिन इस बार संसद ने सख्त रुख अपनाया है
सरकार की नेता पेनी वोंग ने जताई कड़ी आपत्ति
ऑस्ट्रेलियाई संसद में सरकार की नेता और मलेशियाई मूल की सीनेटर पेनी वोंग ने निंदा प्रस्ताव लाते हुए कहा—
“हैनसन ने बुर्का पहनकर न सिर्फ एक पोशाक का मजाक उड़ाया, बल्कि पूरे एक धर्म को बदनाम किया। ऑस्ट्रेलिया में 10 लाख मुसलमान रहते हैं, और उनके विश्वास का अनुचित अपमान किया गया है।”
वोंग ने यह भी कहा कि संसद में ऐसे कदम
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सांप्रदायिक तनाव बढ़ाते हैं
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एक समुदाय को निशाना बनाते हैं
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लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को चोट पहुँचाते हैं