नीतीश कुमार की 10वीं बार CM बनने पर INDIA गठबंधन की चुनौती
बिहार में नीतीश कुमार ने पिछले गुरुवार को दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन उनका यह राजनीतिक सफर केवल बिहार तक सीमित नहीं है। उनकी वापसी को देश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ी घटना माना जा रहा है, खासकर 2026 के चुनावी माहौल के मद्देनज़र। नीतीश कुमार को पहले प्रधानमंत्री की संभावनाओं वाला नेता माना जाता था, जैसे कि सरदार पटेल, एल. के. अडवाणी, प्रणब मुखर्जी या शरद पवार। हालांकि, विभिन्न कारणों से वह राष्ट्रीय सत्ता के शिखर तक नहीं पहुंच सके। उनके समर्थक मानते हैं कि अगर उन्हें INDIA गठबंधन का संयोजक जुलाई 2023 में घोषित किया जाता, तो 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे भी अलग हो सकते थे।
INDIA गठबंधन में नेतृत्व संकट और आंतरिक मतभेद उजागर
वर्तमान में INDIA गठबंधन सिर्फ भाजपा के खिलाफ समान विरोध तक सीमित है। इसमें कोई स्पष्ट नेता या संयोजक नहीं है, न ही कोई तय संरचना, रोडमैप या स्पष्ट राजनीतिक विचारधारा है। यही वजह है कि गठबंधन आज एक मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। कुछ विपक्षी नेताओं का मानना है कि कांग्रेस ने नीतीश कुमार के INDIA संयोजक बनने में बाधा डाली, जबकि कुछ अन्य इसे ममता बनर्जी की जिम्मेदारी मानते हैं। इस विवाद ने गठबंधन के भीतर असंतोष और दिशा की कमी को और उजागर किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन के सामने नेतृत्व और दिशा की चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार की दसवीं बार मुख्यमंत्री बनना बिहार में स्थिरता तो ला सकता है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में INDIA गठबंधन को मजबूत और संगठित करने की चुनौती बनी हुई है। गठबंधन को अब स्पष्ट नेतृत्व और रणनीति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है, नहीं तो आने वाले चुनावों में उसकी पकड़ कमजोर पड़ सकती है। नीतीश कुमार का अनुभव और राजनीतिक समझ उन्हें बिहार में सफल बनाने में मदद करेगा, लेकिन INDIA गठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर एक स्पष्ट दिशा और निर्णायक नेतृत्व की आवश्यकता है। यही इस गठबंधन की बड़ी परीक्षा बनकर सामने आई है।