जयशंकर का कड़ा संदेश: दुर्भाग्य से हमारे पड़ोसी बुरे, आतंकवाद से अपने लोगों को बचाने का हमें पूरा हक

Share your love

चेन्नई।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद और पड़ोसी देशों के रवैये को लेकर दो टूक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से भारत को कुछ ऐसे पड़ोसी मिले हैं, जो जानबूझकर और बिना किसी पछतावे के आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में भारत को अपने लोगों की सुरक्षा करने का पूरा अधिकार है और कोई भी देश यह तय नहीं कर सकता कि भारत को क्या करना चाहिए या क्या नहीं।

IIT मद्रास में दिया सख्त बयान

शुक्रवार को IIT मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा,
“अगर कोई देश यह तय करता है कि वह लगातार आतंकवाद जारी रखेगा, तो हमें अपने लोगों को उससे बचाने का अधिकार है। हम उस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम तय करेंगे। कोई हमें यह नहीं बताएगा कि हमें क्या करना चाहिए।”

उन्होंने साफ किया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी हर कदम उठाएगा।

बांग्लादेश पर बोले जयशंकर: अच्छे पड़ोसी नुकसानदायक नहीं होते

बांग्लादेश में हालिया अशांति पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि उन्हें अलग-अलग तरह के पड़ोसी मिले हैं।
उन्होंने बताया,
“मैं दो दिन पहले ही बांग्लादेश में था। पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गया था। अगर कोई पड़ोसी आपके लिए अच्छा है या कम से कम नुकसानदायक नहीं है, तो कोई समस्या नहीं होती।”

उन्होंने कहा कि जहां अच्छे पड़ोसी होने की भावना होती है, वहां भारत निवेश करता है, मदद करता है और संसाधन साझा करता है।

विदेश नीति और भारतीय सोच पर जोर

विदेश मंत्री ने अपनी स्पीच में भारत की विदेश नीति और वैश्विक भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, जो आज भी एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में मौजूद है।
जयशंकर ने कहा कि भारत ने जानबूझकर लोकतंत्र को अपनाया और आज उसकी जिम्मेदारी है कि वह अपने विचार, संस्कृति और इतिहास को दुनिया के सामने रखे।

पश्चिमी देशों से साझेदारी और ‘वसुधैव कुटुंबकम’

जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों के साथ भारत की साझेदारी जरूरी है और इसे सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा,
“वसुधैव कुटुंबकम का अर्थ यही है कि भारत ने दुनिया को कभी दुश्मन या खतरे के रूप में नहीं देखा। सीमित संसाधनों के बावजूद अधिक प्रभाव डालना ही हमारी विदेश नीति की सोच है।”

वैक्सीन डिप्लोमेसी को बताया ‘जीवनरेखा’

विदेश मंत्री ने कोविड काल में भारत की वैक्सीन डिप्लोमेसी को भावनात्मक रूप से बेहद प्रभावशाली बताया।
उन्होंने कहा कि कई देशों में भारत से पहली वैक्सीन खेप मिलने पर लोगों की आंखों में आंसू थे। उस समय कई विकसित देशों ने जरूरत से ज्यादा वैक्सीन जमा कर ली थी, जबकि छोटे और गरीब देशों के लिए भारत की मदद जीवनरेखा साबित हुई।

अरुणाचल पर दो टूक: भारत का हिस्सा था, है और रहेगा

अरुणाचल प्रदेश को लेकर जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा।
शंघाई एयरपोर्ट पर अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जयशंकर ने कहा,
“इस तरह की हरकतों से जमीन पर कुछ भी बदलने वाला नहीं है।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
News
Videos
Audios
Work With Us