दोस्ती के सुर में दूतावास की शुरुआत
नई दिल्ली:
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के लिए नियुक्त विशेष दूत सर्जियो गोर ने अपने कार्यकाल की शुरुआत एक अलग और प्रतीकात्मक अंदाज़ में की। उन्होंने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में मशहूर अंग्रेज़ी गीत “Hold On, I’m Comin’” का ज़िक्र करते हुए भारत के साथ “सच्ची और मज़बूत दोस्ती” का संकेत दिया। कूटनीतिक मंच पर संगीत का यह संदर्भ राजनीतिक और नीति-निर्माण से जुड़े हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
भारत-अमेरिका रिश्तों को बताया गहरी दोस्ती
सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध केवल रणनीतिक साझेदारी या कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक, यह रिश्ता भरोसे, सहयोग और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक गहरी दोस्ती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य दोनों देशों के बीच संवाद को और मजबूत करना तथा आपसी समझ को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।
व्यापार से तकनीक तक सहयोग बढ़ाने पर जोर
अपने संदेश में गोर ने व्यापार, तकनीक, रक्षा और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात—जैसे आर्थिक अनिश्चितता, सुरक्षा चुनौतियां और तेजी से बदलती तकनीक—का सामना भारत और अमेरिका मिलकर कहीं बेहतर ढंग से कर सकते हैं। गोर ने यह भी माना कि दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक स्थिरता के लिए अहम भूमिका निभा सकती है।
संगीत के जरिए जुड़ाव का संदेश
गीत का हवाला देते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि संगीत लोगों को जोड़ने का काम करता है और यही भावना वे भारत-अमेरिका संबंधों में लाना चाहते हैं। उनका मानना है कि रिश्ते केवल समझौतों और दस्तावेजों से नहीं बनते, बल्कि आपसी सम्मान, विश्वास और लोगों के बीच संपर्क से मजबूत होते हैं।
भारत की संस्कृति और लोकतंत्र का सम्मान
गोर ने भारत की संस्कृति, विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं की भी सराहना की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अपने कार्यकाल के दौरान वे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान देंगे। खासतौर पर युवा वर्ग, स्टार्टअप्स और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को लेकर उन्होंने सकारात्मक संकेत दिए।
नीति विशेषज्ञों की नजर में संदेश के मायने
भारतीय नीति विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जियो गोर का यह संदेश इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में अमेरिका भारत को और अधिक प्राथमिकता दे सकता है। यह शुरुआत दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा का संकेत मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस पर है कि यह “दोस्ती का वादा” आने वाले महीनों में नीतियों और फैसलों के रूप में कैसे सामने आता है।