दिल्ली अदालत ने साइबर क्राइम के तीन आरोपियों को नहीं दी जमानत
कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर लोगों को डराने और ठगी करने का आरोप, तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर राहत से इनकार
दिल्ली की एक अदालत ने साइबर क्राइम के गंभीर मामले में आरोपी तीन व्यक्तियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा की भावना भी पैदा करते हैं, इसलिए आरोपियों को राहत देना न्यायहित में नहीं होगा।
खुद को अधिकारी बताकर करते थे ठगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराया-धमकाया और धोखाधड़ी के जरिए उनसे पैसे ऐंठे। आरोपियों पर निजी और वित्तीय डेटा के दुरुपयोग का भी आरोप है।
हिरासत जरूरी: कोर्ट
अदालत ने कहा कि साइबर अपराधों की प्रकृति गंभीर होती है और ऐसे मामलों में जमानत देने से जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए आरोपियों की न्यायिक हिरासत बनाए रखना आवश्यक है।
तकनीकी साक्ष्य जब्त
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच अंतिम चरण में है। आरोपियों के मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। इन्हीं साक्ष्यों और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
साइबर अपराध पर सख्त संदेश
अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला साइबर अपराधों के खिलाफ कानून की सख्ती को दर्शाता है। विशेषज्ञों ने भी आम लोगों से अपील की है कि वे सरकारी एजेंसियों के नाम पर आने वाली कॉल, मैसेज या ईमेल से सावधान रहें।
पुलिस ने जनता से कहा है कि किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर सेल को दें। अदालत के इस फैसले से साफ संदेश गया है कि साइबर ठगी करने वालों को कानून के दायरे से बाहर नहीं छोड़ा जाएगा।