चिराग पासवान: बिहार की राजनीति में उभरता नया सितारा, पिता की विरासत को दिया नया आयाम

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने कई राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा जिस नेता की हो रही है, वह हैं चिराग पासवान। कभी राजनीतिक उपेक्षा और पारिवारिक बिखराव का सामना करने वाले चिराग आज राज्य की राजनीति में सबसे बड़ा उभरता चेहरा बनकर सामने आए हैं।

एनडीए द्वारा लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 29 सीटें देने पर जब सवाल उठे थे, तब बहुतों को उम्मीद नहीं थी कि चिराग इतना बड़ा प्रदर्शन कर पाएंगे। लेकिन परिणामों ने साबित कर दिया कि भाजपा नेतृत्व का उन पर भरोसा बिल्कुल सही था।

पिता की विरासत को संभालने का कठिन सफर

2020 के बाद जब एलजेपी दो हिस्सों में बंट गई और चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और प्रतीक फ्रीज कर दिया, तब चिराग को बिल्कुल नए सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। उनके चाचा पशुपति कुमार पारस केंद्र में मंत्री बने और चिराग राजनीतिक रूप से अकेले पड़ गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और भाजपा के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।

अपने पिता राम विलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने की उनकी जिद और जमीन से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट स्टैंड ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया।

युवा चेहरों में सबसे आगे

43 साल के चिराग पासवान इस समय बिहार के सबसे लोकप्रिय युवा चेहरों में गिने जा रहे हैं। उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘हनुमान’ बताकर भाजपा और एनडीए के साथ तालमेल मजबूत किया।

चुनाव प्रचार में उन्होंने 173 रैलियां कर नया रेकॉर्ड बनाया और बिहार के टॉप 5 स्टार प्रचारकों में शामिल हुए— पीएम मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और नीतीश कुमार के साथ।

उनका “MY फॉर्मूला — Mahila & Youth” भी खूब चर्चा में रहा, जो आरजेडी के मुस्लिम–यादव समीकरण का जवाब माना गया।

दृष्टि और विकास का वादा

चिराग ने बिहार के लिए “Bihar First, Biharis First” विज़न डॉक्यूमेंट तैयार किया, जिसमें रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है।

उनका कहना है कि वे मुंबई में फिल्म इंडस्ट्री में सफल करियर बना सकते थे, लेकिन “बिहारियों के सम्मान” के लिए उन्होंने राजनीति चुनी।

एनडीए के भीतर बढ़ती अहमियत

चिराग ऐसे समय में उभरकर सामने आए हैं जब भाजपा के पास बिहार में कोई मजबूत मुख्यमंत्री चेहरा नहीं है। ऐसे में उनकी लोकप्रियता और जनसमर्थन एनडीए के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

चुनावी नतीजे साफ कर चुके हैं कि चिराग पासवान अब सिर्फ अपने पिता की पहचान से नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं से बिहार की राजनीति के सबसे चमकते सितारों में शामिल हो चुके हैं।

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