अमेरिकी टैरिफ से तमिलनाडु को नुकसान, स्टालिन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
रोजाना 60 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अमेरिका द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) से राज्य के निर्यातकों को हो रहे भारी नुकसान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करने और ठोस समाधान निकालने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि अमेरिकी टैरिफ के कारण तमिलनाडु के निर्यातकों को प्रतिदिन लगभग 60 करोड़ रुपये का संयुक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
कई प्रमुख उद्योग प्रभावित
मुख्यमंत्री स्टालिन के अनुसार, तमिलनाडु से अमेरिका को कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, ऑटो पार्ट्स और अन्य औद्योगिक वस्तुओं का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने के चलते इन उत्पादों की कीमतें अमेरिकी बाजार में बढ़ गई हैं, जिससे वहां मांग में गिरावट आई है। इसका सीधा असर राज्य के निर्यात ऑर्डर, उत्पादन और आय पर पड़ रहा है।
रोजगार पर मंडराता खतरा
स्टालिन ने पत्र में चेतावनी दी कि निर्यात में गिरावट के चलते कई फैक्ट्रियों में उत्पादन घटाया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर श्रम-प्रधान उद्योगों पर पड़ रहा है, जहां हजारों मजदूरों और कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो बेरोजगारी की समस्या और गंभीर हो सकती है।
केंद्र से समाधान की मांग
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार अमेरिका के साथ उच्च स्तर पर बातचीत कर टैरिफ में राहत दिलाने का प्रयास करे। उन्होंने सुझाव दिया कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जाए। साथ ही, जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक प्रभावित निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज या आर्थिक सहायता देने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा
स्टालिन ने अपने पत्र में कहा कि तमिलनाडु देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में से एक है और यहां के उद्योग राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं। ऐसे में निर्यातकों की परेशानियों को नजरअंदाज करना पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
उद्योग जगत को केंद्र से उम्मीद
मुख्यमंत्री के इस पत्र के बाद राज्य के व्यापार और उद्योग जगत में उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते कदम उठाए गए, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है और तमिलनाडु का निर्यात क्षेत्र दोबारा मजबूती की राह पर लौट सकता है।