अमेरिका-इजराइल हमले पर भारत की चुप्पी समझ से परे: महबूबा मुफ्ती

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जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष Mehbooba Mufti ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमले को लेकर भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए “समझ से परे” है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश ने न तो हमले की निंदा की और न ही ईरान के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

“ईरान ने हर मुश्किल में भारत का साथ दिया”

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत पर परमाणु परीक्षणों के बाद प्रतिबंध लगाए गए थे, तब ईरान ने ही तेल की आपूर्ति जारी रखी थी।

उन्होंने कहा, “कश्मीर मुद्दे पर ज्यादातर मुस्लिम देश पाकिस्तान के साथ खड़े रहे, लेकिन ईरान ने भारत का साथ दिया। यहां तक कि उसने पहले भुगतान लिए बिना भी भारत को तेल दिया।”

नेतृत्व की चुप्पी पर नाराजगी

मुफ्ती ने कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि देश का नेतृत्व इस मामले में चुप क्यों है। उनके मुताबिक, न तो केंद्र सरकार ने इस घटना की निंदा की और न ही ईरान के लोगों के साथ संवेदना जताई।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, भारत को स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाना चाहिए।

ट्रंप और नेतन्याहू के पुतले जलाए

प्रदर्शन के तौर पर महबूबा मुफ्ती ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के पुतले जलाए।

उन्होंने कहा, “हम खुले तौर पर विरोध नहीं कर सकते, लेकिन हमने इन शक्तियों के खिलाफ अपना गुस्सा जताने के लिए पुतले जलाए। हम दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर के लोग, खासकर घाटी के लोग, ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उनके साहस को सलाम करते हैं।”

घाटी से समर्थन का संदेश

मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों का दिल ईरान के साथ है। उनका मानना है कि भारत को अपने पुराने मित्र देशों के साथ खड़ा होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित व स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए।

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