विदेश में नौकरी का ख्वाब दिखाकर 100 लोगों से 70 लाख की ठगी, दो जालसाज गिरफ्तार

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फ्यूचर लाइट मैनपावर नाम से बनाई थी फर्जी कंपनी, सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को लेते थे झांसे में

विदेश में नौकरी का ख्वाब दिखाकर 100 से अधिक लोगों से साथ ठगी करने वाले दो जालसाजों को सेक्टर 126 थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी विदेशी कंपनियों में ऊंची सैलरी, फ्री वीजा, फ्री टिकट, सीमित सीटें और तुरंत जॉइनिंग का झांसा देकर विज्ञानपन तैयार करते थे। जिसे वॉट्सऐप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल, फेसबुक पेज और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पोस्ट किया जाता था। साथ ही विदेश में कंसल्टेंसी या नौकरी दिलाने वाले असली मैनपावर कंपनियों के वॉट्सऐप ग्रुप और टेलीग्राम चैनल में जुड़ने के लिए रिक्वेस्ट भेजते और सदस्य बनते ही अपने फर्जी विज्ञापन पम्पलेट वहां वायरल कर देते थे। इन पम्पलेट पर फर्जी फ्यूचर लाइट मैनपावर कंपनी का नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज होती थी। जिस पर इच्छुक व्यक्ति बात करना शुरू करता तो उससे प्रोसेसिंग फीस, वीजा चार्ज, मेडिकल फीस, एम्बेसी अप्रूवल, टिकट कन्फर्मेशन समेत अलग-अलग बहानों से 1.50 लाख से दो लाख रुपये तक की रकम ठग लेते थे। नौकरी नहीं लगने पर पीड़ित अपने रुपये मांगते तो उन्हें धमकी और उनसे संपर्क तोड़ लेते थे। पीड़ितों की शिकायत पर शुक्रवार को पुलिस ने दोनों को नोएडा सेक्टर 94 डीएमआई टी-प्वाइंट से गिरफ्तार किया है।

एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि तमिलनाडु के त्रिचुरापल्ली निवासी तिरूमूर्ति नोएडा पुलिस से संपर्क किया। पीड़ित ने बताया कि नोएडा की एक कंपनी ने उन्हें विदेशी में नौकरी दिलाने के बहाने 1.50 लाख रुपये ले लिए हैं। साथ ही वीजा प्रक्रिया का बहाना बनाकर पीड़ित के मूल पासपोर्ट भी अपने कब्जे में रख लिया है। आरोपी उनसे अधिक पैसों की मांग किए और उन्हें रकम लेकर सेक्टर-94 स्थित सुपरनोवा बिल्डिंग के पास बुलाया था। सूचना पर सेक्टर 126 थाने की पुलिस पीड़ित के साथ मौके पर पहुंची और दोनों को आरोपियों को कपड़ लिया। दोनों की पहचान नियाज अहमद उर्फ अरमान निवासी महाराजगंज, हाल पता- बाटला हाउस, दिल्ली (उम्र 43 वर्ष) और राजू शाह निवासी सीवान, बिहार, हाल पता मानेसर गुड़गांव के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि ये लोग अब तक 100 से अधिक लोगों के साथ लगभग 70 लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं। आरोपी स्थान बदल-बदल कर घटना करते थे और धनराशि प्राप्त करने के बाद स्थान बदलकर फरार हो जाते थे। साथ ही आरोपी पुलिस से बचने के लिए पीडितों से वॉट्सऐप कॉल से बातचीत करते थे। अक्सर देश के अन्य राज्यों के लोगों को झांसे में लेते थे, नौकरी नहीं मिलने पर पीड़ित जालसाजों को अधिक कॉल करते तो उनका नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था। दोनों को पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

बरामद पासपोर्ट की मदद से पुलिस पीड़ितों करेगी संपर्क

आरोपियों के पा से नौ भारतीय पासपोर्ट, चार मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 67 फर्जी जॉब पंपलेट, साथ फर्जी एयरलाइन टिकट और नौ फर्जी वीजा प्रिंटआउट, 73 हजार 500 कैश और अपराध में उपयोग की जाने वाली टाटा नेक्सन कार बरामद हुई है। पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी नौकरी का झांसा देकर पीड़िता का पासपोर्ट अपने पास रख लेते थे। इसी के दबाव में उन लोगों से अधिक रुपये वसूले जाते थे लेकिन नौकरी नहीं लगवाई जाती थी। पुलिस बरामद पासपोर्ट की मदद से पीड़ितों से संपर्क करेगी।

फर्जी एयरलाइन का टिकट भेजकर जितते थे विश्वास

पूछताछ में दोनों ने बताया कि झासे में आए लोगों को बातचीत के बाद उन्हें एक महीने अंदर का फर्जी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन का टिकट भेजते हैं। जिससे उन्हें विश्वास हो जाता है कि उनकी नौकरी विदेश में लग जाएगी। इसके बाद उनसे अन्य बहाने अलग-अलग दो से तीन फॉर्म भरवाए जाते हैं। उसी के बहाने उनसे रुपये लिए जाते थे। दोनों के पास से बरामद मोबाइल फोनों के जांच में सामने आया है कि ये लोग बहुत से नेशनल और इंटरनेशनल जॉब ग्रुपों से जुड़े हुए थे।

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