Venezuela Crisis: वेनेजुएला पर अमेरिकी कब्जे से भारत को अरबों डॉलर का फायदा संभव, रूस पर भी पड़ेगा असर

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नई दिल्ली:
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बदले हालात भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इससे भारत को अरबों डॉलर की राहत मिलने के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार में उसकी स्थिति मजबूत हो सकती है।

भारत को क्यों हो सकता है बड़ा फायदा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लंबे समय से वेनेजुएला में फंसा भारत का करीब एक अरब डॉलर का बकाया भुगतान अब वापस मिलने की संभावना है। साथ ही भारत दोबारा वेनेजुएला में तेल उत्पादन शुरू कर सकता है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वर्षों से बाधित था।

ओएनजीसी बढ़ा सकती है तेल उत्पादन

भारत की प्रमुख विदेशी तेल कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र का संयुक्त संचालन करती है। अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते जरूरी तकनीक और उपकरण नहीं मिल पाने से यहां उत्पादन घटकर सिर्फ 5,000–10,000 बैरल प्रतिदिन रह गया था।
अब अगर प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो ओएनजीसी वहां आधुनिक उपकरण भेजकर उत्पादन तेजी से बढ़ा सकती है।

अरबों डॉलर का बकाया मिलने की उम्मीद

वेनेजुएला ने 2014 तक ओएनजीसी को करीब 53 करोड़ डॉलर का भुगतान नहीं किया था। इसके बाद भी लगभग इतनी ही राशि का भुगतान अटका रहा। ऑडिट की अनुमति न मिलने से मामला वर्षों से रुका हुआ है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी नियंत्रण के बाद हालात बदल सकते हैं और ओएनजीसी तेल उत्पादन से मिलने वाले राजस्व से अपना करीब एक अरब डॉलर का बकाया वसूल सकती है।

रूस पर भी पड़ सकता है असर

इस घटनाक्रम का असर रूस पर भी पड़ सकता है। भारत पहले ही तेल आयात में विविधता की ओर बढ़ रहा है। वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ने पर भारत की रूस से तेल निर्भरता घट सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत कैराबोबो-1 जैसे भारी तेल क्षेत्रों में भी निवेश कर सकता है। वहीं, अमेरिका की भूमिका से वेनेजुएला की तेल कंपनी PdVSA के पुनर्गठन की भी संभावना जताई जा रही है।


वेनेजुएला में बदले सत्ता समीकरण भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लाभ का नया रास्ता खोल सकते हैं, जबकि वैश्विक तेल बाजार और रूस की स्थिति पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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