“ट्रंप के परमाणु परीक्षण आदेश से भारत के लिए खुला नया न्यूक्लियर अवसर?”

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 33 साल बाद फिर से परमाणु हथियार परीक्षण (Nuclear Test) शुरू करने का आदेश दिया है। यह फैसला दुनिया भर में एक बार फिर से न्यूक्लियर रेस (परमाणु दौड़) को तेज करने वाला साबित हो सकता है। ट्रंप ने सेना को नए भूमिगत परमाणु परीक्षण करने का निर्देश दिया है। जब उनसे इस बारे में समयसीमा पूछी गई, तो उन्होंने कहा, “आपको बहुत जल्द पता चल जाएगा।” ट्रंप का यह आदेश ऐसे समय आया है जब रूस ने हाल ही में Poseidon नामक परमाणु क्षमता वाला ड्रोन परीक्षण किया था। हालांकि रूस का कहना है कि उसका परीक्षण “नॉन-न्यूक्लियर” था, लेकिन अमेरिका ने इसे सीधा जवाब देने के तौर पर देखा है।

अब सवाल यह है कि क्या भारत को भी इस नई परमाणु दौड़ में शामिल होना चाहिए?
भारत के पास पहले से ही एक संतुलित परमाणु हथियार भंडार (Nuclear Arsenal) है और भारत की नीति हमेशा “No First Use” यानी पहले परमाणु हमला न करने की रही है। भारत ने अपने हथियारों को निरोधक शक्ति (Deterrence Power) के रूप में विकसित किया है, न कि आक्रमण के लिए।

हालांकि, ट्रंप के इस कदम से भारत के सामने नई तकनीकी साझेदारी और परमाणु ऊर्जा सहयोग के अवसर जरूर खुल सकते हैं। अमेरिका और भारत पहले से ही सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट के तहत साथ काम कर रहे हैं। अगर आने वाले समय में अमेरिका और रूस परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करते हैं, तो भारत को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है लेकिन फिलहाल भारत के लिए सबसे अच्छा रास्ता यही है कि वह शांति, तकनीकी विकास और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़े।

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