थाणे ट्रेन हादसे में पहली बार रेलवे इंजीनियरों पर लापरवाही का केस दर्ज, चार लोगों की मौत के बाद सख्त कार्रवाई
रेलवे इतिहास में पहली बार इंजीनियरों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला थाणे जिले के मुंब्रा स्टेशन के पास हुए ट्रेन हादसे से जुड़ा है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और नौ लोग घायल हुए थे। यह हादसा 9 जून 2025 को हुआ था, जब दो लोकल ट्रेनें दीवा और मुंब्रा स्टेशन के बीच एक मोड़ पर आमने-सामने से गुज़र रही थीं। ट्रैक की खराब हालत और अधूरी मरम्मत के कारण यात्रियों का संतुलन बिगड़ गया और वे चलती ट्रेन से गिर गए। अब गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (GRP) ने इस मामले में सेंट्रल रेलवे के दो इंजीनियरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में असिस्टेंट डिविजनल इंजीनियर विशाल डोलस और सीनियर सेक्शन इंजीनियर समर यादव शामिल हैं।
एफआईआर के अनुसार, दोनों इंजीनियरों ने ट्रैक की मरम्मत के दौरान हुई गड़बड़ियों को नज़रअंदाज़ किया और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया। रिपोर्ट में बताया गया कि हादसे से कुछ दिन पहले ट्रैक नंबर 4 को बदला गया था, लेकिन वेल्डिंग का काम अधूरा छोड़ दिया गया था, जिसके कारण पटरियों में असमानता आ गई। तकनीकी जांच में पाया गया कि एक हिस्सा नीचे धंस गया था जबकि दूसरा ऊपर उठा हुआ था। इससे ट्रेनें झटके खाती हुई आगे बढ़ीं और एक ट्रेन का झुकाव दूसरी पटरी की ओर हो गया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दो पटरियों के बीच की दूरी सुरक्षा मानकों से कम थी। जहां यह दूरी 4,506 मिलीमीटर होनी चाहिए थी, वहीं मौके पर सिर्फ 4,265 मिलीमीटर पाई गई। इस मामले के बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया है। GRP अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई रेलवे की जवाबदेही तय करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, उच्च स्तरीय जांच टीम अब यह पता लगा रही है कि क्या अन्य अधिकारी भी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार थे।