शिल्प हाट में सिर्फ उत्पाद नहीं, कारीगरों की कहानियां भी बनीं आकर्षण
उत्तर प्रदेश दिवस पर सजी कला और संस्कृति
नोएडा सेक्टर-33ए स्थित शिल्प हाट में शनिवार से सोमवार तक उत्तर प्रदेश दिवस का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। इस मेले में देश के अलग-अलग राज्यों से आए कारीगर अपने क्षेत्र की पारंपरिक वस्तुएं लेकर पहुंचे हैं, जिन्हें देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। शिल्प हाट में सिर्फ उत्पाद ही नहीं, बल्कि उन्हें बनाने वाले कारीगरों की मेहनत और संघर्ष की कहानियां भी लोगों को प्रभावित कर रही हैं।
74 साल की अंबिका देवी बनीं हिम्मत की मिसाल
बिहार के मधुबनी जिले से आईं 74 वर्षीय अंबिका देवी शिल्प हाट की खास आकर्षण हैं। मधुबनी पेंटिंग की कलाकार अंबिका देवी को बिहार सरकार समेत कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि बचपन से पेंटिंग का शौक था, लेकिन 30 वर्ष की उम्र के बाद ससुराल वालों के सहयोग से उन्होंने इसे पेशा बनाया।
वह रद्दी कागज, लकड़ी और मिट्टी से पहले आकृतियां तैयार करती हैं, फिर उन पर हाथ से पेंटिंग बनाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में 15 से 30 दिन का समय लगता है। वह कृष्ण-राधा की चित्रकारी विशेष रूप से बनाती हैं और देश के कई राज्यों में जाकर अपनी कला का प्रदर्शन करती हैं।
कश्मीरी ड्राई फ्रूट्स की बढ़ी मांग
कश्मीर से आए निसार शिल्प हाट में ड्राई फ्रूट्स और पारंपरिक कश्मीरी उत्पादों के साथ लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। उनकी दुकान पर केसर, काहवा, बादाम, अखरोट, शिलाजीत और अन्य उत्पाद उपलब्ध हैं। निसार के अनुसार, शनिवार को ही करीब 30 हजार रुपये की बिक्री हुई। खासतौर पर कश्मीरी केसर, जिसकी कीमत 350 रुपये प्रति ग्राम है, लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
बनारसी साड़ियों पर महिलाओं की पसंद
वाराणसी से आए अरमान ने हाथ से बनी बनारसी साड़ियों की स्टॉल लगाई है। 17 वर्षों से पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े अरमान बताते हैं कि एक साड़ी तैयार करने में करीब 15 दिन लगते हैं। शुद्ध रेशम और पारंपरिक डिजाइन वाली इन साड़ियों की कीमत 9 हजार रुपये तक है, और महिलाएं इन्हें खूब पसंद कर रही हैं।