सीजफायर पर सियासत: कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

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 Mediawali news

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम (सीजफायर) के बाद जहां पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, वहीं भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है।

 जयराम रमेश का बयान: ‘विश्वगुरु’ की छवि पर सवाल

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी “चुप्पी” ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि खुद को “विश्वगुरु” बताने वाली सरकार इस पूरे संकट में कहीं नजर नहीं आई। जयराम रमेश के मुताबिक, यह युद्धविराम भले ही एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसमें भारत की भूमिका लगभग नगण्य रही, जो चिंता का विषय है

 पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

कांग्रेस ने विशेष रूप से इस बात को लेकर सरकार को घेरा कि इस युद्धविराम में Pakistan की भूमिका सामने आई है।
पार्टी का कहना है कि यह स्थिति भारत की कूटनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस के अनुसार, जिस देश को भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने की कोशिश कर रहा है, वही देश अब मध्यस्थता की भूमिका में दिख रहा है, जो सरकार की विदेश नीति की विफलता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री की ‘चुप्पी’ बनी मुद्दा

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा और वेस्ट बैंक में इस्राइल की कार्रवाइयों पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया। उनका कहना है कि ऐसे वैश्विक मुद्दों पर भारत की चुप्पी उसकी पारंपरिक संतुलित विदेश नीति से अलग नजर आती है। कांग्रेस का मानना है कि भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए था।

 ‘पर्सनल डिप्लोमेसी’ पर सवाल

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की “अत्यधिक व्यक्तिगत कूटनीति” (Personal Diplomacy) की भी आलोचना की। पार्टी का कहना है कि विदेश नीति व्यक्तिगत संबंधों पर नहीं, बल्कि संस्थागत और रणनीतिक दृष्टिकोण पर आधारित होनी चाहिए।जयराम रमेश ने इसे एक “गंभीर झटका” बताते हुए कहा कि इससे भारत की वैश्विक साख प्रभावित हुई है।

 ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भी उठे सवाल

कांग्रेस ने एक और मुद्दा उठाते हुए पूछा कि “ऑपरेशन सिंदूर” को अचानक क्यों रोक दिया गया।
पार्टी का दावा है कि 10 मई 2025 को इस ऑपरेशन को रोकने की घोषणा अमेरिका की ओर से की गई थी, और इस पर सरकार ने अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है।

 निष्कर्ष: कूटनीति बनाम राजनीति

पश्चिम एशिया में युद्धविराम ने जहां शांति की उम्मीद जगाई है, वहीं भारत में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
कांग्रेस सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह दर्शाता है कि वैश्विक राजनीति में हर कदम का असर घरेलू राजनीति पर भी पड़ता है।

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