रूस से तेल खरीद पर भारत का स्पष्ट रुख
“किसी की अनुमति की जरूरत नहीं”, ट्रंप की 30 दिन की छूट के बीच सरकार का बड़ा बयान
Mediawali news
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा और इसके लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हाल ही में Donald Trump प्रशासन ने रूस के तेल पर 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी, जिसके बाद भारत ने कहा कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय हित और बाजार कीमतों पर आधारित है।
सरकार ने बयान में कहा कि भारत हमेशा वहां से तेल खरीदता है जहां सबसे सस्ती और प्रतिस्पर्धी कीमत मिलती है। इसलिए रूस से तेल आयात जारी रहना स्वाभाविक है।
होर्मुज जलमार्ग संकट के बावजूद ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz मार्ग पर खतरे के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। सरकार के मुताबिक भारत ने अपने तेल आयात स्रोतों को बढ़ाकर 27 देशों से 40 देशों तक कर दिया है।
इस रणनीति से भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट के समय भी वैकल्पिक सप्लाई मिलती रहती है और देश में ईंधन की कमी नहीं होती।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारत के लिए सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है।
सरकार के अनुसार फरवरी 2026 तक भी रूस भारत को सबसे अधिक तेल दे रहा है।
दरअसल रूस द्वारा दिए गए डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल के कारण भारतीय रिफाइनरियों के लिए यह सौदा आर्थिक रूप से फायदेमंद रहा है।
भारत के पास मजबूत तेल भंडार
सरकार ने बताया कि भारत के पास वर्तमान में 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद का भंडार मौजूद है।
यह भंडार देश की करीब 7 से 8 सप्ताह की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है।
इसके अलावा भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है, जो घरेलू मांग से भी ज्यादा है।
मध्य-पूर्व युद्ध से बढ़े वैश्विक तेल दाम
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है।
तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उछाल आया है और एक ही दिन में करीब 8.5% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व का तनाव जारी रहता है तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और कई देशों की ऊर्जा रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।