रेड फोर्ट ब्लास्ट केस: उमर नबी ने कांट्रवर्शियल कदम उठाए, कश्मीर में किया मेल-जोल
दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि मुख्य आरोपी उमर नबी ने अपने साथी आतंकियों के बीच मतभेदों के चलते अक्टूबर की शुरुआत में सह-साजिशकर्ता अदील रदर की शादी में शामिल नहीं हुए। हालांकि, कश्मीर में मुफ्ती इरफान वेगै की गिरफ्तारी के बाद, उन्होंने 18 अक्टूबर को क्वाज़ीगुंड पहुंचकर बाकी आतंकियों के साथ अपने संबंध सुधारने और उन्हें “ट्रैक पर बनाए रखने” की कोशिश की। जांच सूत्रों के अनुसार, उमर नबी ने 2023 से आईईडी (विस्फोटक) पर शोध शुरू कर रखा था और वह खुद को कश्मीर के आतंकवादी नेताओं बुरहान वानी और ज़ाकिर मूसा का उत्तराधिकारी मानते थे। अन्य आरोपियों, मुझम्मिल गणाई, रदर और वेगै, अक्सर उमर के साथ किसी खास मुद्दे पर सहमत नहीं होते थे।
आईएसआईएस विचारधारा से प्रभावित उमर नबी की रणनीतिक दूरी और संगठनात्मक नियंत्रण
जहां बाकी समूह अल-क़ायदा की विचारधारा के करीब थे, वहीं उमर नबी आईएसआईएस/दाइश को अपना आदर्श मानते थे। इसी विचारधारा और हमले की रणनीति को लेकर मतभेदों के कारण उमर ने पहले अपने साथी की शादी में शामिल नहीं होना सही समझा। जांचकर्ताओं का कहना है कि उमर नबी ने इस कदम से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि कश्मीर में चल रही आतंकवादी गतिविधियों में उसकी पकड़ बनी रहे। इसके अलावा, वह अपने समूह को संगठित और सक्रिय बनाए रखना चाहते थे।
विचारधारा और साजिश को लेकर बढ़ते मतभेद, सुरक्षा एजेंसियों के सामने जटिल चुनौती
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि उमर नबी और उसके सहयोगियों के बीच विचारधारा, वित्त और हमले की योजना को लेकर लगातार मतभेद थे। इस वजह से उनका व्यक्तिगत और कार्य संबंध कई बार तनावपूर्ण रहता था। यह मामला दिल्ली और कश्मीर दोनों ही जगह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि इसमें शामिल आरोपी लंबे समय से स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े हैं। जांच अभी जारी है और आरोपियों के अन्य सहयोगियों और उनकी योजना की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।