परंपरा, संगीत और राष्ट्रगौरव का संगम: बीटिंग रिट्रीट के साथ 77वें गणतंत्र दिवस का भव्य समापन
विजय चौक पर आयोजित पारंपरिक बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ देश ने 77वें गणतंत्र दिवस समारोहों का औपचारिक समापन किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में यह आयोजन राष्ट्रगौरव, सैन्य परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना। समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और सशस्त्र बलों के बैंडों ने देशभक्ति संगीत से वातावरण को भावविभोर कर दिया।
क्या है बीटिंग रिट्रीट की परंपरा
बीटिंग रिट्रीट हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोहों के समापन का प्रतीक होता है। इसकी जड़ें सैन्य परंपराओं में हैं, जब सूर्यास्त के समय सैनिक अपने शिविरों में लौटते थे। आज यह आयोजन थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बैंडों की शानदार प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय सशस्त्र बलों के अनुशासन, शौर्य और गौरव को दर्शाता है।
शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी से बढ़ी गरिमा
समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इसके राष्ट्रीय महत्व को और मजबूत किया। तीनों संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं ने सशस्त्र बलों के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम को नजदीक से देखा।
वायुसेना बैंड की ‘सिंदूर’ संरचना बनी आकर्षण
भारतीय वायुसेना बैंड की ‘सिंदूर’ संरचना समारोह का मुख्य आकर्षण रही। यह प्रस्तुति ऑपरेशन सिंदूर को समर्पित थी, जिसमें संगीत और दृश्य संरचना के माध्यम से सैन्य बलों के बलिदान और पराक्रम को श्रद्धांजलि दी गई। दर्शकों ने इस प्रस्तुति को जोरदार तालियों से सराहा।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीटिंग रिट्रीट समारोह भारत की समृद्ध सैन्य विरासत और सशस्त्र बलों के अदम्य साहस का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों का अनुशासन और शौर्य हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है।
गणतंत्र दिवस का भावपूर्ण समापन
संगीत, परंपरा और राष्ट्रभक्ति से सजे इस समारोह के साथ 77वें गणतंत्र दिवस का औपचारिक समापन हुआ। तिरंगे के सान्निध्य में आयोजित इस आयोजन ने देशवासियों के मन में एकता, गर्व और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था को और मजबूत किया।