नोएडा सेक्टर-118 जमीन मामला: सीबीआई की जांच तेज, बायर्स पर बढ़ा आर्थिक बोझ
Mediawali news, noida
नोएडा के सेक्टर-118 में जमीन आवंटन से जुड़े एक पुराने मामले में अब जांच तेज हो गई है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों से लंबी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों से करीब पांच घंटे तक सवाल-जवाब किए गए, जिसमें जमीन के आवंटन और प्रोजेक्ट से जुड़े कई अहम पहलुओं पर जानकारी ली गई।
यह मामला साल 2010-11 का है, जब सेक्टर-118 की ग्रुप हाउसिंग परियोजना की जमीन आईवीआर बिल्डर को दी गई थी। इसके कुछ समय बाद, साल 2012 में आईवीआर ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए दो अन्य बड़ी कंपनियों सुपरटेक और अजनारा के साथ समझौता किया। इन कंपनियों को प्रोजेक्ट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब सीबीआई यह जांच कर रही है कि उस समय जमीन आवंटन के दौरान सभी नियमों का सही तरीके से पालन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आईवीआर ने प्रोजेक्ट किसी अन्य बिल्डर को देने से पहले अथॉरिटी से अनुमति ली थी या नहीं।
जांच का एक बड़ा हिस्सा फंड के इस्तेमाल पर भी केंद्रित है। एजेंसी यह जानना चाहती है कि प्रोजेक्ट के लिए जुटाए गए पैसों का सही उपयोग हुआ या कहीं गड़बड़ी हुई। इसके अलावा, सबवेंशन स्कीम के तहत घर खरीदने वाले लोगों के साथ किसी तरह की धोखाधड़ी तो नहीं हुई, इसकी भी जांच की जा रही है।
इस पूरे मामले का सबसे ज्यादा असर आम बायर्स पर पड़ा है। शुरुआत में योजना यह थी कि घर खरीदने वालों को तब तक लोन की किस्त नहीं देनी पड़ेगी, जब तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो जाता। लेकिन बाद में बिल्डरों ने बैंकों को किस्त देना बंद कर दिया। इसके चलते बैंकों ने सीधे बायर्स से पैसे वसूलने शुरू कर दिए, जिससे कई लोगों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ गया।
सीबीआई अब यह भी जांच रही है कि कहीं बिल्डर कंपनियों और अन्य संबंधित लोगों के बीच कोई मिलीभगत तो नहीं थी। अधिकारियों से फाइलों, मंजूरी प्रक्रिया और उस समय लिए गए फैसलों के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई है।
इस जांच के नतीजे आने के बाद ही साफ होगा कि इस पूरे मामले में किसकी क्या जिम्मेदारी थी और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बायर्स को उम्मीद है कि जांच से उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी परेशानी का समाधान निकलेगा।