नोएडा की हवा में घुल रहा जहर, बिना फिटनेस वाले वाहन बने प्रदूषण का बड़ा कारण
सांस लेना हुआ मुश्किल, अस्पतालों में बढ़े मरीज
नोएडा की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। शहर और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा पार कर चुका है। शनिवार को नोएडा का एक्यूआई 348 और ग्रेटर नोएडा का 330 दर्ज किया गया, जो रेड जोन की श्रेणी में आता है। इसका सीधा असर आम जनता की सेहत पर पड़ रहा है। शहर के अस्पतालों में सांस की तकलीफ, खांसी, अस्थमा और आंखों में जलन जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार इस जहरीली हवा में सांस लेना फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम कर देता है और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है।
10 हजार से ज्यादा वाहन बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रहे
प्रदूषण विशेषज्ञों और परिवहन विभाग का मानना है कि बिना फिटनेस वाले कमर्शियल वाहन वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं। आंकड़ों के अनुसार, जिले में करीब 10 हजार वाहन ऐसे हैं जिनका फिटनेस परीक्षण लंबे समय से नहीं हुआ है। ये वाहन सड़कों पर धुआं छोड़ते हुए दौड़ रहे हैं और हवा में खतरनाक कार्बन तथा सूक्ष्म कण फैला रहे हैं। इनसे निकलने वाला जहरीला धुआं न सिर्फ पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है।
परिवहन विभाग ने ऐसे सभी वाहन मालिकों को नोटिस जारी किया है और चेतावनी दी है कि जल्द फिटनेस जांच नहीं कराने पर वाहनों को जब्त कर लिया जाएगा। प्रशासन ने विशेष जांच टीमें बनाकर फिटनेस अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। जिले में कुल 1.30 लाख कमर्शियल वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें ट्रक, बसें, टैक्सियां और ऑटो शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि इनकी नियमित जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में शहर की हवा और अधिक जहरीली हो जाएगी।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो नोएडा की हवा में जहर और घुलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।