नैनो उर्वरक अपनाने के लिए कृषि विभाग की कार्यशाला
ग्रेटर नोएडा।
उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर राजीव कुमार की अध्यक्षता में विकास भवन के सभागार में कृषि विभाग एवं इफको सहकारी उर्वरक प्रयोगकर्ता संस्था के संयुक्त तत्वावधान में नैनो उर्वरकों के उपयोग एवं उनके लाभ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ब्लॉक स्तर के कृषि अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता विवेका सिंह तथा वरिष्ठ प्राविधिक सहायक अम्बा प्रकाश शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
जैविक खेती और उर्वरक सब्सिडी पर जानकारी
उप कृषि निदेशक राजीव कुमार ने उपस्थित कर्मचारियों को जैविक खेती के महत्व और रासायनिक उर्वरकों पर दी जा रही सरकारी सब्सिडी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले जहां एक एकड़ में एक बोरी यूरिया का उपयोग होता था, वहीं अब किसान दो बोरी यूरिया प्रति एकड़ प्रयोग कर रहे हैं। इसके कारण मिट्टी की अम्लीयता बढ़ रही है और कार्बनिक तत्वों में लगातार कमी आ रही है, जो दीर्घकाल में फसलों के लिए नुकसानदायक है।
पीएम प्रणाम योजना और रासायनिक उर्वरकों के दुष्परिणाम
जिला कृषि अधिकारी विवेक दुबे ने पीएम प्रणाम योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले हानिकारक प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता घटती है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। साथ ही उन्होंने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग और उनकी उपयोगिता पर भी विस्तृत जानकारी साझा की।
धरती बचाओ अभियान और मिट्टी जांच पर जोर
वरिष्ठ प्राविधिक सहायक अम्बा प्रकाश शर्मा ने सरकार द्वारा संचालित ‘धरती बचाओ अभियान’ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों और कृषि कर्मचारियों को समय-समय पर मिट्टी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया, ताकि संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
नैनो उर्वरकों के तकनीकी लाभ बताए
इफको के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने नैनो उर्वरकों के प्रयोग की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरक कम मात्रा में अधिक प्रभावी होते हैं और इससे मृदा स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। साथ ही रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।