केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में उठा विवाद

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इन दिनों चल रहे केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (IFFK) में उस वक्त विवाद खड़ा हो गया, जब कुछ फिल्मों की स्क्रीनिंग अचानक रद्द कर दी गई। बताया गया कि इन फिल्मों को केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली थी, जिसके चलते आयोजकों को स्क्रीनिंग रोकनी पड़ी। इस फैसले के बाद फिल्म इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच नाराजगी देखने को मिली।

क्यों रोकी गई थी फिल्मों की स्क्रीनिंग?

सूत्रों के अनुसार, जिन फिल्मों की स्क्रीनिंग रोकी गई, उन्हें केंद्र से औपचारिक अनुमति नहीं मिली थी। इसी वजह से आयोजन समिति को अस्थायी तौर पर इन फिल्मों को फेस्टिवल के शेड्यूल से हटाना पड़ा। मामला सामने आते ही यह सवाल उठने लगा कि क्या रचनात्मक स्वतंत्रता पर असर डाला जा रहा है।

रसूल पुकुट्टी का बयान

इस पूरे विवाद पर मशहूर साउंड डिजाइनर और ऑस्कर विजेता रसूल पुकुट्टी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि

“केंद्र से मंजूरी न मिलने के बावजूद, केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सभी तय फिल्मों को उनके निर्धारित समय पर दिखाया जाएगा।”

उनके इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि फिल्म फेस्टिवल प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं है और दर्शकों को सभी फिल्में देखने का मौका मिलेगा।

फेस्टिवल समिति का रुख

फेस्टिवल से जुड़े लोगों का कहना है कि IFFK हमेशा से सिनेमा की आज़ादी और विविध आवाज़ों का मंच रहा है। समिति का मानना है कि फिल्मों की स्क्रीनिंग रोकना फेस्टिवल की मूल भावना के खिलाफ है, इसलिए अब तय किया गया है कि सभी फिल्में अपने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार दिखाई जाएंगी।

फिल्म प्रेमियों को राहत

इस फैसले के बाद फिल्म प्रेमियों और निर्देशकों को बड़ी राहत मिली है। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि यह कदम रचनात्मक अभिव्यक्ति की आज़ादी को मजबूत करता है।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र और राज्य स्तर पर इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है। फिलहाल, रसूल पुकुट्टी के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्मों की स्क्रीनिंग तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी

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