कार से रेकी कर निर्माणाधीन इमारतों में चोरी करने वाला गिरोह पकड़ा गया
सीलिंग टाइल चोरी से खुला मामला, पुलिस ने रेकी कार समेत चार आरोपियों को दबोचा
कार से रेकी करने के बाद बंद पड़ी निर्माणाधीन इमारतों से सामान चोरी करने वाले गिरोह के सरगना समेत चार सदस्यों को फेज दो थाने की पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से चोरी का सामान और चाकू समेत अन्य सामान बरामद हुआ है। ये लोग कार से रेकी कर रात में चोरी की घटना को अंजाम देते थे। पुलिस को कई शिकायतें मिलीं तो टीम बनाकर इन लोगों की पहचान जुटाकर पकड़ा गया।
एडिशनल डीसीपी सेंट्रल नोएडा संतोष कुमार ने बताया कि एक नामी बिल्डर की सीज बिल्डिंग के अंदर से सीलिंग टाइल चोरी की घटना सामने आई थी। साथ ही फेज दो थाना क्षेत्र में कई अन्य निर्माणाधीन इमारतों के अंदर से भी चोरी होने की सूचना मिली। इसके बाद थाने में वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह के बदमाशों को पकड़ने के लिए टीम बनाई गई। रविवार को गिरोह के सदस्य जब थानाक्षेत्र में वारदात करने की फिराक में दाखिल हुए, तभी पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। पहले तो आरोपियों ने कुछ नहीं बताया, लेकिन कड़ाई से पूछताछ में उन्होंने चोरी करने वाले गिरोह का सदस्य होने की बात स्वीकार कर ली। आरोपियों की पहचान इकोटेक थर्ड थानाक्षेत्र के जलपुरा गांव निवासी गुलशनोवर, हल्दौनी गांव निवासी सचिन ठाकुर, मुजफ्फरनगर के ककरौली निवासी सोनू खान और अलीगढ़ के अतरौली निवासी विशाल चौधरी के रूप में हुई। जिस कार में आरोपी सवार थे, उसी से वे दिन में रेकी भी करते थे। सरगना गुलशनोवर कई सालों से चोरी की वारदात कर रहा है।
लंबे समय से सक्रिय सरगना, युवाओं को आसान कमाई का लालच देकर बनाया साथी
जिले के अलावा आसपास के जनपदों की पुलिस से भी आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। बरामद सीलिंग पाइप की कीमत करीब 50 हजार रुपये बताई जा रही है। चोरी का सामान गिरोह का सरगना कार से ले जाकर एकांत स्थान पर रख देता था और ग्राहकों की तलाश के बाद कम दाम में बेच दिया जाता था। रकम गिरोह के सदस्यों में बांटी जाती थी, जिसमें सरगना 40 प्रतिशत हिस्सा लेता था।
गुलशनोवर दसवीं पास है। सचिन ठाकुर और विशाल चौधरी ने बारहवीं तक पढ़ाई की है, जबकि सोनू खान अशिक्षित है। सरगना की उम्र 32 साल है, जबकि सोनू 22, सचिन और विशाल 19-19 साल के हैं। गुलशनोवर का अन्य सदस्यों से संपर्क एक साल पहले ही हुआ था। सोनू, सचिन और विशाल नौकरी करना चाहते थे पर अच्छी नौकरी न मिलने पर सरगना के आसान कमाई के लालच में गिरोह में शामिल हो गए। आरोपियों के परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है। पूछताछ में सरगना ने अपने कई अन्य साथियों के नाम भी बताए हैं। पुलिस उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।