गुरुद्वारा जाने से इनकार करने पर क्रिश्चियन आर्मी अफसर बर्खास्त

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सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: “ऐसा व्यक्ति फोर्स में रहने लायक नहीं, सेना में अनुशासन सर्वोपरि”

भारतीय सेना के एक क्रिश्चियन अफसर सैमुअल कमलेसन को गुरुद्वारा जाने से इनकार करने और साथी सैनिकों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान न करने पर बर्खास्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेना के इस फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए कहा कि यह व्यवहार गंभीर अनुशासनहीनता है और सेना जैसी संस्था में ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच—CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची—ने कमलेसन को “झगड़ालू और सेना के लिए मिसफिट” बताया।
बेंच ने कहा:

  • “आप अपने सैनिकों की भावनाओं का सम्मान नहीं कर सके।”

  • “आपका धार्मिक अहंकार सैनिकों की एकता पर असर डालता है।”

  • “सेना का अनुशासन सर्वोपरि है, और एक कमांडिंग अफसर से आदर्श व्यवहार की उम्मीद होती है।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि गुरुद्वारा दुनिया के सबसे सेक्युलर स्थलों में से एक माना जाता है। ऐसे स्थान में प्रवेश करने से इनकार करना दूसरे धर्मों का अपमान है।

दिल्ली हाईकोर्ट भी पहले दे चुका है फैसला

सुप्रीम कोर्ट से पहले, मई 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सेना की कार्रवाई को सही ठहराया था।
हाईकोर्ट ने कहा था—

  • कमलेसन ने अपने धर्म को आदेशों से ऊपर रखा

  • ऐसा व्यवहार रेजिमेंट की एकजुटता और मनोबल को नुकसान पहुंचाता है

  • युद्ध स्थिति में यह रवैया बेहद खतरनाक साबित हो सकता है

अफसर का तर्क: “मेरी ईसाई आस्था मुझे मंदिर या गुरुद्वारा के अंदर जाने नहीं देती”

अफसर सैमुअल कमलेसन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कोर्ट में कहा:

  • अफसर हर हफ्ते सैनिकों के साथ मंदिर और गुरुद्वारे तक जाते थे

  • लेकिन पूजा, हवन, आरती या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान अंदर नहीं जाते थे

  • उनका दावा: “ईसाई धर्म मुझे ऐसा करने की अनुमति नहीं देता।”

उन्होंने कहा कि कमलेसन अनुशासित अफसर हैं और केवल पूजा करवाने के लिए मजबूर न किए जाने की मांग कर रहे थे।

सेना का जवाब: बार-बार समझाया, फिर भी आदेशों की अवहेलना

सेना के अनुसार:

  • 2017 में 3rd कैवेलरी रेजिमेंट में पोस्टिंग के दौरान मामला शुरू हुआ

  • धार्मिक परेड रूटीन का हिस्सा थी

  • अफसर ने बार-बार आदेशों के बावजूद पूरी परेड में हिस्सा नहीं लिया

  • इसे आदेश की अवहेलना और अनुशासनहीनता माना गया

लंबी जांच और सुनवाई के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की तीन प्रमुख बातें
  1. अनुशासन सर्वोपरि: अच्छे अफसर होने के बावजूद यदि अनुशासन टूटा तो सेना में जगह नहीं।

  2. धार्मिक विविधता का सम्मान: गुरुद्वारा जैसी सार्वभौमिक जगह को अस्वीकार करना आस्था का अपमान है।

  3. एकजुटता पहली प्राथमिकता: एक लीडर को अपने सैनिकों की भावनाओं और टीम स्पिरिट को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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