एल्विश यादव केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: FIR रद्द, नोएडा पुलिस की जांच पर उठे सवाल
Mediawali news, Noida
मशहूर यूट्यूबर एल्विश यादव से जुड़े चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए नोएडा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह मामला 2023 में कथित तौर पर पार्टियों में सांप के जहर के इस्तेमाल और वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन से जुड़ा था।
कोर्ट ने पाया कि मामले में पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं थे, जिनके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई जारी रखी जा सके। इस फैसले के बाद एल्विश यादव के खिलाफ चल रही पूरी कानूनी प्रक्रिया पर फिलहाल विराम लग गया है।
जांच में कहां हुई चूक?
इस मामले में नोएडा पुलिस की जांच पर कई सवाल खड़े हुए हैं।
पुलिस कोर्ट में ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर पाई
डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की कड़ी कमजोर रही
आरोपों की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी रही
धाराओं के चयन और केस निर्माण में भी कमियां नजर आईं
बताया गया कि जांच के दौरान सबूतों को कानूनी रूप से मजबूत तरीके से पेश नहीं किया जा सका, जिससे मामला अदालत में कमजोर पड़ गया।
वहीं, पार्टी में पकड़े गए एक सपेरे ने बाद में पुलिस को बताया कि वह एल्विश यादव को जानता तक नहीं था, बल्कि उसके नाम का इस्तेमाल कर बुकिंग की गई थी।
केस का पूरा घटनाक्रम
इस हाई-प्रोफाइल केस की टाइमलाइन इस प्रकार रही:
3 नवंबर 2023: नोएडा सेक्टर-49 थाने में एफआईआर दर्ज
नवंबर 2023: छापेमारी, कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी, सांप और जहर बरामद होने का दावा
दिसंबर 2023: इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर जांच आगे बढ़ी
मार्च 2024: एल्विश यादव को गिरफ्तार किया गया, बाद में जमानत मिली
19 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर रद्द कर दी
यह मामला शुरुआत से ही सोशल मीडिया और आम जनता के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
पुलिस का पक्ष और आगे की राह
नोएडा पुलिस का कहना है कि उन्होंने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के तहत कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे कोर्ट के आदेश का सम्मान करेंगे और आगे की कार्रवाई उसी के अनुसार तय की जाएगी।
पुलिस ने कहा कि जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई
भविष्य में भी अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे
ऐसे मामलों में जांच को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा
इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि एल्विश यादव के खिलाफ इस मामले में अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं बची है। हालांकि, यह केस एक उदाहरण बनकर सामने आया है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में जांच एजेंसियों को साक्ष्य जुटाने और उन्हें अदालत में प्रस्तुत करने में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।