दिल्ली MCD उपचुनाव में केवल 39% मतदान, नतीजे 3 दिसंबर को
दिल्ली एमसीडी उपचुनाव में कम वोटिंग — सिर्फ 39% मतदान दर्ज
रविवार को दिल्ली में हुए एमसीडी उपचुनावों में अपेक्षित उत्साह नहीं दिखा। राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक 12 वार्डों में कुल मिलाकर केवल 39% मतदान हुआ। मतदान समाप्त होने के बाद सभी ईवीएम मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रख दिया गया है और 3 दिसंबर को मतगणना की जाएगी। कम मतदान ने राजनीतिक दलों के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मतदान की शुरुआत धीमी, पूरे दिन turnout कमजोर
मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ, लेकिन शुरुआती घंटों में जनता की भागीदारी बेहद कम रही। 9:30 बजे तक सिर्फ 5.4% लोग ही मतदान केंद्रों तक पहुंचे। 11:30 बजे तक यह संख्या बढ़कर 12.63% हुई। दोपहर 1:30 बजे 21.84% और 3:30 बजे तक 31.13% मतदान दर्ज किया गया। शाम 5:30 बजे जब मतदान समाप्त हुआ, तो अंतिम प्रतिशत 38.51% रहा, जिसे औसतन 39% माना गया। आंकड़ों से स्पष्ट है कि पूरे दिन वोटिंग का ग्राफ मंद गति से ही आगे बढ़ा।
सबसे अधिक मतदान चांदनी महल में, सबसे कम ग्रेटर कैलाश में
12 वार्डों में से चांदनी महल ने सबसे ज्यादा 55.93% मतदान के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके अलावा मुण्डका में 44.5% और संगम विहार-A में 44.4% मतदान दर्ज किया गया। इसके विपरीत ग्रेटर कैलाश में सबसे कम यानी केवल 26.7% लोग ही वोट डालने पहुंचे। राजधानी जैसे शहर में इतनी कम वोटिंग चिंताजनक मानी जा रही है। शालीमार बाग-B, जो मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विधायक बनने के बाद खाली हुआ था, वहां 37.53% मतदान दर्ज किया गया।
पिछले चुनावों की तुलना में turnout काफी कम
ऐतिहासिक रूप से एमसीडी चुनावों में मतदान प्रतिशत कम रहता है, लेकिन इस बार उपचुनाव में turnout और भी नीचे गिरा। 2022 के एमसीडी चुनाव में 50.48% मतदान हुआ था, जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में 60.54% और 2024 के लोकसभा चुनाव में 58.78% मतदान दर्ज हुआ था। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो इस बार का 39% turnout राजनीतिक रूप से निराशजनक रहा।
कम मतदान के पीछे संभावित कारण
अधिकारियों के अनुसार, कम मतदान की वजह मतदाताओं की उदासीनता, स्थानीय मुद्दों पर कम जागरूकता और सप्ताहांत होने के कारण व्यस्तता हो सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उपचुनावों में आमतौर पर जनता का रुझान कम रहता है, लेकिन इतनी कम भागीदारी राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी का संकेत है।
अब निगाहें 3 दिसंबर के नतीजों पर
कम मतदान के बावजूद अब सबकी नज़रें 3 दिसंबर की मतगणना पर हैं। नतीजे तय करेंगे कि 12 सीटों पर किस पार्टी ने जनता का भरोसा जीता और दिल्ली की स्थानीय राजनीति में किसकी पकड़ मजबूत बनी। इन परिणामों से आने वाले महीनों में एमसीडी के राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं।