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कानपुर के शिवराजपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय पाठकपुर में मंगलवार को एक गरिमामयी और भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती स्वर्णलता को सेवानिवृत्ति पर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। 13 वर्षों तक विद्यालय में अपनी सेवाएं देने वाली स्वर्णलता के सम्मान में पूरा विद्यालय परिसर भावनाओं से भर उठा। गांव के लोगों, शिक्षकों और छात्रों ने नम आंखों से उन्हें विदा किया, जिससे माहौल बेहद भावुक हो गया।
शिक्षा और संस्कार की मिसाल रहीं स्वर्णलता
अपने कार्यकाल के दौरान स्वर्णलता ने विद्यालय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों को केवल पाठ्यक्रम की शिक्षा ही नहीं दी, बल्कि संस्कार और अनुशासन का भी पाठ पढ़ाया। उनके ममतामयी स्वभाव और समर्पण के कारण विद्यालय एक परिवार की तरह विकसित हुआ। उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की और विकासखंड में अपनी अलग पहचान बनाई।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बीआरसी कार्यालय से आए कृपाशंकर यादव ने कहा कि एक शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि उसका ज्ञान समाज को लगातार दिशा देता रहता है।
सम्मान और यादों के साथ विदाई
कार्यक्रम का संचालन उद्घोषक सुबोध शुक्ला ने प्रभावशाली ढंग से किया, जिससे समारोह और भी भावपूर्ण बन गया। विद्यालय स्टाफ ने स्वर्णलता को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और उपहार भेंट कर सम्मानित किया।
इंचार्ज प्रधानाध्यापक ज्योति मिश्रा सहित सभी शिक्षकों ने उनके साथ बिताए अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन हमेशा प्रेरणादायक रहेगा और उनकी कमी विद्यालय में हमेशा महसूस की जाएगी।
इस अवसर पर शिक्षक हेमलता वर्मा, शैलेंद्र त्रिपाठी, वर्षा अवस्थी, रूपांजलि, रेनू वर्मा, गजेंद्र सिंह सहित कई गणमान्य नागरिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। समारोह ने स्वर्णलता के योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।