जयराम रमेश बोले– नई परिभाषा से पर्वत श्रृंखला का अस्तित्व खतरे में
नई दिल्ली। कांग्रेस ने केंद्र और राज्यों की डबल इंजन सरकार पर अरावली पर्वत श्रृंखला को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार की नीतियों और अरावली की नई परिभाषा से इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कांग्रेस के मुताबिक, नई परिभाषा लागू होने पर 90 प्रतिशत से अधिक अरावली क्षेत्र कानूनी सुरक्षा से बाहर हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला, पुराने फैसले पर लगी रोक
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है, जहां अदालत ने अपने पिछले फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले निर्देशों पर टिकी हैं। कांग्रेस का कहना है कि अदालत का फैसला अरावली के भविष्य के लिए बेहद अहम होगा।
सिर्फ खनन नहीं, रियल एस्टेट भी खतरा
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अरावली को नुकसान सिर्फ अवैध खनन से नहीं हो रहा, बल्कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देकर भी इसके पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि पहले से ही कमजोर हो चुके अरावली क्षेत्र में यह विकास गतिविधियां पर्यावरणीय संतुलन को और बिगाड़ेंगी।
जयराम रमेश का सरकार पर सीधा हमला
कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि देश इस समय अरावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों का इंतजार कर रहा है। उनके मुताबिक, अरावली की नई परिभाषा पहले से ही बर्बाद हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र में और ज्यादा तबाही मचाएगी।
फॉरेस्ट सर्वे की सिफारिशों की अनदेखी का आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) की सिफारिशों के खिलाफ जाकर नई दिल्ली और जयपुर की डबल इंजन सरकारें अरावली क्षेत्र में रियल एस्टेट डेवलपमेंट के दरवाजे खोल रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण के बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता देने का उदाहरण है।
पर्यावरण और भविष्य पर सवाल
कांग्रेस का कहना है कि अरावली सिर्फ एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। अगर इसे कमजोर किया गया, तो जल संकट, प्रदूषण और जलवायु असंतुलन जैसी समस्याएं और गहराएंगी।