2.50 लाख करोड़ के निवेश से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा नया भविष्य, जेवर–दनकौर से बुलंदशहर तक 2 लाख से अधिक लोग बनेंगे आत्मनिर्भर
नोएडा। जिले के ग्रामीण इलाकों में रोजगार और कौशल विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। जेवर, दनकौर, दादरी और बुलंदशहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए करीब 2.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश से बड़ा कदम उठाया गया है। इसके तहत राज्य व्यवसायिक प्रशिक्षण परिषद (SCVT) और नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (NAEC) के बीच एक अहम एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
2 लाख से ज्यादा युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
इस समझौते के तहत प्रदेश के 18 जिलों के ग्रामीण इलाकों में युवाओं को वस्त्र उद्योग से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। अकेले गौतमबुद्ध नगर जिले में जेवर, दनकौर, दादरी, नोएडा के 80 गांवों और बुलंदशहर से सटे इलाकों के 2 लाख से अधिक ग्रामीण युवाओं को स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। यह प्रशिक्षण उन्हें रेडीमेड गारमेंट और वस्त्र उद्योग में रोजगार के लिए तैयार करेगा।
अपैरल पार्क में मिलेगा रोजगार का मौका
प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को जेवर में बन रहे अपैरल क्लस्टर पार्क की 120 बड़ी इकाइयों में काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही युवाओं को इस तरह से प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे वस्त्र उद्योग के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार के विकल्प तलाश सकें।
गांवों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र
ग्रामीण युवाओं तक सीधे पहुंच बनाने के लिए जेवर, दनकौर, दादरी और आसपास के गांवों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक की पूरी प्रक्रिया एनएईसी के डिजिटल पोर्टल ‘कौशल गंगा’ के माध्यम से संचालित की जाएगी। इसके अलावा कौशल आजीविका और कौशल बाजार पोर्टल युवाओं को रोजगार और बाजार से जोड़ने में मदद करेंगे।
50 फीसदी महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य
इस योजना में 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। अपैरल क्लस्टर के अध्यक्ष ललित ठुकराल के अनुसार, ग्रामीण महिलाओं में कपड़ों की बुनाई और डिजाइनिंग की प्राकृतिक कला होती है, जिसे निखारकर उन्हें घर बैठे या उद्योग से जोड़कर रोजगार दिया जा सकता है।
पहले से 10 लाख को मिल चुका है रोजगार
ललित ठुकराल ने बताया कि जिले में मौजूद करीब 4,000 अपैरल इकाइयों से अब तक 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल चुका है। अब इस नई योजना के जरिए 2 लाख से ज्यादा ग्रामीणों को रोजगार देने की तैयारी है।
यह पहल न सिर्फ ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत उदाहरण बनेगी।