यात्रियों की जिंदगी दांव पर लगाकर चल रही सरकारी बसें
बिना सीट बेल्ट के ड्राइवर, मेडिकल किट का हाल बेहाल और फायर सिलेंडर में एक्सपायरी का पता नहीं
नोएडा में यूपी रोडवेज की बसों की संख्या 305 है इसमें 188 बसें मोरना डिपो से चलती है। रोजाना हजारों यात्रियों को नोएडा से अलीगढ़, मेरठ, एटा, आगरा, मथुरा समेत कई जगहों तक ले जाने वाली बसों में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और न ही फॉग लाइट मौजूद है, जो सर्दी में और नोएडा जैसे क्षेत्र में अधिक पॉल्यूशन के कारण बहुत अनिवार्य हो जाता है। एनबीटी की टीम ने जब पड़ताल किया तो सेक्टर 37 में खड़ी बसों में कोई फॉग लाइट नहीं मिला। अधिकारी से जब इसपर जवाब मांगा गया तो उनका कहना है कि बसों में ऑल वेदर लाइट लगाई गई है, जिसके बाद किसी तरह की दूसरी फॉग लाइट लगाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि, धुंध में दूर तक दिखने वाली फॉग लाइट रियलिटी में बसों में नहीं लगे हैं, जिससे रात के समय दुर्घटना होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
वहीं बसों में फर्स्ट ऐड बॉक्स का होना अनिवार्य है, जो सुरक्षा के नजर से बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि एनबीटी की टीम ने जब बसों में जा जाकर जांच किया तो सभी बसों में लगभग फर्स्ट ऐड बॉक्स धूल से भरा दिखा और कुछ बसों में तो बॉक्स टूटा और खाली पड़ा हुआ है। इस बॉक्स की मदद से किसी एक व्यक्ति को भी प्राथमिक उपचार नहीं किया जा सकता है। बताते चलें कि सरकारी बसों में लगभग 50 से 60 सीट होती है, ऐसे में किसी दुर्घटना के समय लोग प्राथमिक उपचार तक नहीं ले पाऐंगे।
इसके अलावा बसों में फायर एक्सटिंग्यूशर की स्थिति ऐसी है कि उसपर न एक्सपायरी डेट है और न ही मेन्यूफेक्चर डेट। हालांकि, अधिकारी यह दावा करते हैं कि हर 6 महीने में फायर एक्सटिंग्यूशर में गैस रिफिल किया जाता है और हर एक बस में दो फायर एक्सटिंग्यूशर मौजूद है। जबकी रियलिटी चेक में एनबीटी ने पाया कि तीन बसों में से एक बस में फायर एक्सटिंग्यूशर की जगह बसों में झाड़ू व बालटीन रखे हुए हैं।
वहीं परिवहन निगम के अधिकारी का कहना है कि बसों में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीसीटीवी कैमरे की जगह पैनिक बटन लगाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि कि शहर में होने वाली कई घटनाओं के बाद से सीसीटीवी लगाने का प्रावधान भी किया गया था। बावजूद इसके बसों में आज भी बेसिक सुविधा न होने से महिलाएं असुरक्षित हैं।