साइबर ठगों के चंगुल में फंसे व्यक्तियों तक पहुंची बनाने लगी है, नोएडा पुलिस
साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसे लाइव पीड़ितों को समय रहते बचाने के लिए नोएडा पुलिस ने एक खास टीम बनाई है। यह देश भर के ऐसे मामलों पर नज़र रख रही है जिनमें निवेश या डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में फंसाकर रकम ऐंठी जा रही है। साइबर कमांडो सचिन धामा की टीम ने I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) और NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के सहयोग से तीन दिन में ऐसे सात लोगों को फ्रॉड कर रहे ठगों के चंगुल से निकाला है। इस तरह नोएडा की साइबर क्राइम यूनिट ने सात राज्यों में फंसे सात पीड़ितों को समय रहते ठगी से बचाकर उनके करोड़ों रुपये बचा लिए हैं। यह पहली बार है जब पुलिस ने अपराध होने से पीड़ित के पास पहुंच गई।
इस ऑपरेशन की कमान साइबर कमांडो सचिन धामा ने संभाल रहे हैं। टीम ने साइबर व वित्तीय इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर संदिग्ध ट्रांजैक्शन और नेटवर्क पैटर्न का जानकारी की है। इसी आधार पर उन नागरिकों की पहचान हुई जो सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर स्टॉक मार्केट व ट्रेडिंग के नाम पर फर्जी स्कीमों में निवेश कर रहे थे।
टीम ने तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों में फैले सात ‘लाइव पीड़ितों’ तक पहुँच बनाई। समय पर चेतावनी देकर उन्हें ट्रांजैक्शन करने से रोका। इस उपलब्धि पर साइबर यूनिट को प्रदेश डीजीपी की तरफ से पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने पहली बार ऐसा किया है। देश में यह काम करने वाली नोएडा पुलिस तीसरे नंबर पर है।
एडीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि टीम ने 7 लाइव पीड़ितों की पहचान की। ये सभी नागरिक पिछले कई महीनों से शेयर ट्रेडिंग के जाल में फंसे हुए थे। पूछताछ में इन लोगों ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लोगों को स्टॉक मार्केट और अन्य निवेश योजनाएं दिखाकर अच्छे रिटर्न का झांसा दिया गया और इस प्रकार उन्हें फ्रॉड निवेश नेटवर्क से जोड़ लिया गया। वहीं पीड़ितों को लंबे समय तक यह एहसास नहीं हो पाया कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। साइबर टीम ने हर व्यक्ति से सीधे संपर्क कर उनसे बातचीत की और जानकारी दी कि आप लोग साइबर ठगों के जाल में फंसे हुए हैं। समय पर दी गई चेतावनी के बाद सभी ने आगे की ट्रांजैक्शन रोक दी। इसके बाद पीड़ितों ने ठगों के व्हाट्सएप ग्रुप को छोड़ दिया। वहीं शिकायत मामलों में पुलिस शिकायत लेकर पीड़ितों से ठगे गए रुपयों को बैंक खातों में फ्रीज करा रही है।
केस-1
यूपी के एक बैंक कर्मचारी ने 14 लाख रुपये पहले ही फर्जी स्कीम में डाल दिए थे। अब वह और भी रकम भेजने वाला था। नोएडा साइबर टीम ने संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़कर उससे संपर्क किया और ठगी की हकीकत समझाई। नतीजतन, उसने आगे पैसे भेजने से इनकार कर दिया। साथ ही पुलिस ने खातों के आधार पर कार्रवाई कर पीड़ित की रकम को भी बचा लिया है। संबंधित थाने में केस दर्ज कर जांच भी शुरू कर दी गई है।
केस-2
तमिलनाडु निवासी एक व्यक्ति भी इसी निवेश ठगी नेटवर्क के जाल में फँस गया था। चुनौती यह थी कि उसे हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाएँ नहीं आती थीं। इसके बाद नोएडा पुलिस की साइबर टीम ने तमिलनाडु पुलिस के सहयोग से स्थानीय भाषा में बातचीत की। इसके बाद उसे ठगों के बारे में जानकारी दी गई। पीड़ित पहले ही 40 लाख रुपये का निवेश कर चुका था और आगे भी निवेश करने की तैयारी में था, लेकिन साइबर टीम की तरफ से समय पर दी गई चेतावनी से उसने लेन-देन रोक दिया और अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रख सका।