प्रदूषण से मिली राहत: नोएडा–ग्रेटर नोएडा की हवा ऑरेंज जोन में, लोगों ने ली राहत की सांस

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AQI में सुधार, लेकिन संवेदनशील लोगों को अब भी सतर्क रहने की सलाह


लगातार कई दिनों तक गंभीर वायु प्रदूषण की मार झेल रहे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए सोमवार राहत भरा दिन लेकर आया। रविवार को जहां दोनों शहर रेड जोन में थे, वहीं सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार दर्ज किया गया और हवा ऑरेंज जोन में पहुंच गई। इससे आम लोगों को कुछ हद तक राहत महसूस हुई, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

AQI में आया सुधार

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को ग्रेटर नोएडा का AQI 236 दर्ज किया गया, जबकि नोएडा का AQI 260 रहा। यह स्तर ‘खराब’ (ऑरेंज जोन) श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले, रविवार को ग्रेटर नोएडा का AQI 315 और नोएडा का AQI 307 रिकॉर्ड किया गया था, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में शामिल है। रविवार को तो ग्रेटर नोएडा देश के सबसे प्रदूषित शहरों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया था, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई थी।

मौसम बना सुधार की वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा की गति में बढ़ोतरी और मौसम में हल्के बदलाव के चलते प्रदूषक तत्वों का फैलाव हुआ, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला। मौसम विभाग का कहना है कि तापमान में मामूली बढ़ोतरी, दिन के समय धूप निकलना और हवा चलने से प्रदूषण के असर में कमी आई है। यही कारण है कि एक ही दिन में AQI में करीब 50 से 70 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई।

अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हवा

हालांकि हवा ऑरेंज जोन में पहुंच गई है, लेकिन यह स्तर अब भी बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए नुकसानदायक माना जाता है। डॉक्टरों ने अस्थमा, एलर्जी, सांस फूलने, आंखों में जलन और गले में खराश की समस्या से जूझ रहे लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुबह और देर शाम के समय खुले में व्यायाम करने से बचें और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करें।

आने वाले दिनों में क्या रहेगी स्थिति

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहा और हवा की गति बनी रही, तो आने वाले दिनों में प्रदूषण के स्तर में और सुधार संभव है। हालांकि वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और औद्योगिक गतिविधियां अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। यदि इन पर सख्ती से नियंत्रण नहीं किया गया, तो प्रदूषण दोबारा गंभीर स्तर पर पहुंच सकता है।

प्रशासन और लोगों की भूमिका जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को जहां प्रदूषण नियंत्रण के नियमों को सख्ती से लागू करना होगा, वहीं आम लोगों को भी सार्वजनिक परिवहन के उपयोग, कार पूलिंग और अनावश्यक वाहन प्रयोग से बचने जैसे कदम उठाने होंगे। तभी नोएडा और ग्रेटर नोएडा को स्थायी रूप से साफ हवा मिल सकेगी।

फिलहाल, AQI में आई गिरावट से लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित हवा के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

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