पीयूसी को किया नजरअंदाज तो भरना होगा भारी चालान, इस साल वसूले गए 2 करोड़ से अधिक जुर्माने
बिना पीयूसी गाड़ियों से बढ़ रहा प्रदूषण स्तर
नोएडा की सड़कों पर बड़ी संख्या में ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) नहीं है। प्रदूषण जांच न करवाने की वजह से शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया और अब तक 2.12 करोड़ रुपये से अधिक का चालान काटा है। बावजूद इसके, बिना पीयूसी वाले वाहन रोजाना धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
वाहन मालिकों की लापरवाही और तकनीकी दिक्कतें
कई वाहन मालिकों का कहना है कि प्रदूषण जांच केंद्रों पर लंबी कतारें रहती हैं, जिससे जांच करवाना मुश्किल होता है। कुछ इलाकों में मशीनों की खराबी या ऑपरेटर की अनुपस्थिति के कारण भी पीयूसी बनवाना संभव नहीं होता। कई लोगों को यह जानकारी भी नहीं होती कि हर छह महीने में पीयूसी का नवीनीकरण कराना जरूरी है।
कुछ चालक इसे झंझट भरी प्रक्रिया मानते हुए टालते रहते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ता जा रहा है।
संख्याएं बता रहीं हैं बढ़ती लापरवाही
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में अब तक 6259 वाहनों पर कार्रवाई की गई है। वहीं, पिछले वर्ष 2023-24 में केवल 2518 वाहनों पर ही चालान हुआ था।
इस वर्ष का जुर्माना पिछले साल की तुलना में दोगुना से अधिक है, जो साफ दर्शाता है कि वाहन मालिकों की लापरवाही बढ़ी है।
अधिकारियों ने की सख्त कार्रवाई की घोषणा
अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच ही 3042 वाहनों पर कार्रवाई कर 1 करोड़ 12 लाख 30 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
विभाग ने बताया कि अब शहर के प्रमुख मार्गों और बॉर्डर इलाकों में विशेष टीमें तैनात हैं।
साथ ही ऑटोमेटिक कैमरे और ई-चालान प्रणाली के जरिए भी नियम तोड़ने वालों की पहचान की जा रही है।
जांच केंद्र और शुल्क
वर्तमान में जिले में 136 प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं, जिनमें से अधिकतर पेट्रोल पंपों पर हैं ताकि वाहन चालकों को आसानी से सुविधा मिल सके।
निर्धारित शुल्क:
दोपहिया वाहन – ₹65
तीन या चारपहिया वाहन – ₹85
डीजल वाहन – ₹115
परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे समय पर पीयूसी प्रमाण पत्र का नवीनीकरण करवाएं।
अन्यथा चालान और भारी जुर्माना दोनों से बचना मुश्किल होगा।
विभाग का लक्ष्य है कि सभी वाहन पर्यावरण मानकों के अनुरूप चलें, ताकि शहर का वायु प्रदूषण नियंत्रित रखा जा सके।