नोएडा में महिला बिजनेसमैन बनी ‘डीजिटल अरेस्ट’ की शिकार: 3 घंटे में साइबर ठगों ने उड़ाए 24 लाख रुपये

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फर्जी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई का झांसा देकर ठगों ने बनाया दबाव



नोएडा की एक महिला बिजनेसमैन साइबर अपराधियों के नए ठगी के जाल में फंस गईं। ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी और साइबर पुलिस बताकर उन्हें “डीजिटल अरेस्ट” कर लिया। करीब तीन घंटे तक वीडियो कॉल पर “जांच” का नाटक चलता रहा और इस दौरान पीड़िता से 24 लाख रुपये ठग लिए गए। इतना ही नहीं, ठगों ने नकली सुप्रीम कोर्ट सुनवाई दिखाकर महिला को गिरफ्तारी का डर भी दिखाया।


टेलीकॉम अधिकारी बन शुरू किया खेल


ग्रेटर नोएडा की अमरपाली लीजर वैली सोसायटी निवासी अनीता श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को “टेलीकॉम विभाग का अधिकारी” बताया और कहा कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अपराध में हुआ है, जिसके चलते नंबर कुछ देर में बंद कर दिया जाएगा। महिला कुछ समझ पातीं, तभी एक अन्य कॉल पर “साइबर क्राइम पुलिस अधिकारी” बनकर ठग ने वीडियो कॉल शुरू कर दी।


वीडियो कॉल पर बना नकली कोर्टरूम


ठगों ने दावा किया कि उनके खिलाफ केस दर्ज हो चुका है और उसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। वीडियो कॉल पर उन्हें फर्जी “जज” और “वकील” दिखाए गए, जिन्होंने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल बताया। महिला को डराने के लिए नकली केस फाइल दिखाई गई और कहा गया कि पुलिस उनके घर की निगरानी कर रही है। डर के माहौल में महिला को कहा गया कि वह जांच पूरी होने तक कमरे में रहे और किसी को जानकारी न दे।


“रकम वेरिफाई” करने के बहाने ठगे 24 लाख रुपये


फर्जी साइबर पुलिस ने महिला से कहा कि जांच के लिए उनके बैंक अकाउंट में जमा रकम को “वेरिफाई” करना होगा। महिला ने निर्देशानुसार इंटरनेट बैंकिंग से 24 लाख रुपये एक खाते में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगों ने अतिरिक्त रकम मांगी, तब उन्हें शक हुआ। महिला ने तुरंत परिवार को जानकारी दी, जिसके बाद साइबर पोर्टल और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।


एटीएस और साइबर पुलिस ने शुरू की जांच


साइबर थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि यह “डीजिटल अरेस्ट” का नया मॉडस ऑपरेंडी है, जिसमें अपराधी नकली कोर्ट और पुलिस का माहौल बनाकर पीड़ित को मानसिक रूप से फंसा लेते हैं।

“यह नया साइबर फ्रॉड पैटर्न बेहद खतरनाक है। लोग किसी भी स्थिति में वीडियो कॉल पर किसी अज्ञात व्यक्ति को बैंक डिटेल न दें और ऐसे मामलों की तुरंत शिकायत करें।” — साइबर थाने के अधिकारी

इस घटना ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि डिजिटल युग में ठगी के तरीके भी “हाई-टेक” हो चुके हैं — और सतर्क रहना ही सुरक्षा की पहली शर्त है।

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