नोएडा में डॉग लवर्स का विरोध प्रदर्शन: “ये आवारा नहीं, हमारे हैं” के नारे गूंजे

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नोएडा में डॉग लवर्स का विरोध प्रदर्शन: “ये आवारा नहीं, हमारे हैं” के नारे गूंजे

 

नोएडा में रविवार को सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ डॉग लवर्स ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। “यह आवारा नहीं, हमारे हैं” लिखे पोस्टर और बैनर लेकर दर्जनों पशु प्रेमी डीएनडी टोल प्लाजा पर जमा हुए और शांतिपूर्ण धरना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कुत्ते समाज का हिस्सा हैं और उन्हें “आवारा” या “खतरा” बताना अमानवीय है। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले शेल्टर होम्स की उचित व्यवस्था करे, तभी सड़क से कुत्तों को हटाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश बना विरोध की वजह

दरअसल, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ते डॉग-बाइट के मामलों पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को आठ हफ्तों के भीतर शेल्टर होम में स्थानांतरित किया जाए। इसके साथ ही एनएचएआई को निर्देश दिया गया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से आवारा जानवरों और मवेशियों को हटाया जाए।

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की विशेष बेंच ने यह भी कहा कि दो सप्ताह के भीतर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसे संस्थानों की पहचान करनी होगी, जहां से कुत्तों को शिफ्ट किया जाएगा। कोर्ट ने संस्थानों के प्रमुखों को परिसर के चारों ओर दीवार, गेट और बाड़ लगाने के निर्देश दिए ताकि कुत्ते अंदर प्रवेश न कर सकें। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी।

“पहले व्यवस्था करें, फिर हटाएं” – पशु प्रेमियों की अपील

नोएडा में प्रदर्शन कर रहे डॉग लवर्स का कहना था कि शेल्टर होम्स में कुत्तों के लिए भोजन, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर कमी है। यदि उन्हें वहां भेजा गया, तो उनकी हालत और खराब हो जाएगी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हम कुत्तों को परिवार का हिस्सा मानते हैं। सरकार पहले उनके लिए सुरक्षित व्यवस्था करे, फिर सड़क से हटाने की कार्रवाई करे।”

शांतिपूर्ण धरना, कोई अव्यवस्था नहीं

डीएनडी टोल प्लाजा पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बिना किसी नारेबाजी या तोड़फोड़ के शांतिपूर्ण ढंग से अपना पक्ष रखा। धरने के बाद सभी डॉग लवर्स वापस लौट गए। हालांकि, इस प्रदर्शन ने प्रशासन और स्थानीय निकायों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या कोर्ट के आदेश को लागू करने से पहले पशु कल्याण के मानकों पर ध्यान दिया गया है।

“कुत्ते हमारे साथी हैं, अपराधी नहीं। उन्हें संरक्षण चाहिए, दंड नहीं।” — डॉग लवर, नोएडा

यह विरोध केवल एक आदेश के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज में पशुओं के प्रति दृष्टिकोण को लेकर भी एक सवाल खड़ा कर रहा है — क्या हम उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए तैयार हैं?

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