जन औषधि के बाद अब पशु औषधि केंद्र, पशुपालकों को मिलेगी सस्ती सरकारी दवाएं
जिले के हर ब्लॉक में खुलेगा पशु औषधि विक्रय केंद्र
शहर और ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों के लिए एक राहत भरी पहल शुरू होने जा रही है। केंद्र सरकार के निर्देश पर अब जन औषधि केंद्रों की तर्ज पर पशु औषधि विक्रय केंद्र खोले जाएंगे। जिले में पहली बार पशुओं के लिए सरकारी दवाओं और वैक्सीन की व्यवस्था की जा रही है। इसकी शुरुआत जिले के हर ब्लॉक में एक पशु औषधि विक्रय केंद्र खोलकर की जाएगी।
महंगी दवाओं से मिलेगी राहत
अब तक पशुपालकों को पशुओं की दवाओं के लिए निजी मेडिकल स्टोर पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां दवाएं महंगे दामों पर मिलती थीं। कई बार आर्थिक मजबूरी के कारण समय पर इलाज नहीं हो पाता था। खासकर छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या बनी हुई थी। नए पशु औषधि केंद्र खुलने से निजी बाजार की मनमानी कीमतों पर लगाम लगेगी और सरकारी निगरानी में प्रमाणित दवाएं उपलब्ध होंगी।
20 प्रतिशत तक सस्ती होंगी दवाएं और वैक्सीन
सरकार की गाइडलाइन के अनुसार इन केंद्रों पर पशुओं की जरूरी दवाएं और वैक्सीन ब्रांडेड दवाओं की तुलना में करीब 20 प्रतिशत तक सस्ती होंगी। इन केंद्रों का संचालन पशुपालन विभाग की देखरेख में किया जाएगा। दवाओं की गुणवत्ता, भंडारण और वितरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पशुओं के स्वास्थ्य से किसी तरह का समझौता न हो।
पशुपालकों और दुग्ध उत्पादन को मिलेगा फायदा
जिले में गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ती दवाओं और समय पर टीकाकरण से पशुओं की बीमारियों पर नियंत्रण किया जा सकेगा। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आय में भी इजाफा होगा। लोगों का कहना है कि ब्लॉक स्तर पर केंद्र खुलने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
लावारिस पशुओं के इलाज में भी होगी सहूलियत
शहरी इलाकों में लावारिस पशुओं के इलाज को लेकर भी यह योजना मददगार साबित होगी। दवाएं आसानी से उपलब्ध होने से इन पशुओं का समय पर उपचार संभव हो सकेगा। पशुपालन विभाग ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और नियमित निगरानी की बात कही है।
पशु औषधि केंद्र खोलने की शर्तें
गाइडलाइन के अनुसार पशु औषधि विक्रय केंद्र खोलने के लिए फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। इसके लिए कम से कम 120 वर्ग फुट जगह, ड्रग लाइसेंस और तय मानकों का पालन करना होगा। प्रधानमंत्री कृषक समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार की ओर से केंद्र खोलने के लिए 1.50 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।