घर के कचरे से बन रही गैस, खाद और प्लास्टिक उत्पाद, सेक्टर-34 का रिसाइकल प्लांट बना मिसाल
नोएडा। शहर के सेक्टर-34 में स्थित नोएडा का सबसे बड़ा रिसाइकल प्लांट अब कचरे को बोझ नहीं, बल्कि संसाधन में बदल रहा है। यहां रोजाना घरों, स्कूलों और अस्पतालों से जुटाए गए करीब 7.5 टन कचरे को रिसाइकल कर बायोगैस, जैव खाद और प्लास्टिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। यह प्लांट न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है, बल्कि सेक्टरवासियों की समझदारी से “कूड़े से सोना” बनाने का उदाहरण भी बन गया है।
8 टन क्षमता वाले प्लांट में रोज बन रही 100 किलो बायोगैस
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के महासचिव धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि वर्ष 2020 में गीले कचरे से गैस और खाद बनाने की शुरुआत की गई थी। शुरुआत में मशीन की क्षमता 2 टन थी, जिसे बढ़ाकर अब 8 टन कर दिया गया है। इस प्लांट में रोजाना 100 किलोग्राम से अधिक बायोगैस तैयार की जा रही है।
प्लांट का संचालन निजी कंपनी इन्वोकेयर वेंचर द्वारा किया जा रहा है। कंपनी के मैनेजर अभिजीत दत्ता के अनुसार, पहले सेक्टर का कचरा डंपिंग यार्ड में जाता था, जहां आग लगने और धुएं से पर्यावरण को भारी नुकसान होता था। प्लांट शुरू होने के बाद घर-घर जाकर गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा किया जाता है।
45 दिनों की प्रक्रिया से बनती है खाद
गीले कचरे को मशीन के जरिए कंपोस्ट किया जाता है और करीब 45 दिनों तक स्टोर किया जाता है। इसके बाद लिक्विड फॉर्म से गैस अलग की जाती है और ऊपर जमा अवशेष को खाद के रूप में सुखाकर तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगते हैं, लेकिन इससे उच्च गुणवत्ता की जैव खाद प्राप्त होती है।
कचरे की गैस से अस्पताल में बन रहा खाना
इस प्लांट में बनी बायोगैस को रोजाना दो निजी अस्पतालों को सप्लाई किया जा रहा है। मानस हॉस्पिटल में इसी गैस से मरीजों का खाना पकाया जाता है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, यह गैस आईजीएल की तुलना में करीब 40 प्रतिशत सस्ती है। फिलहाल गैस को स्टोर नहीं किया जा सकता, इसलिए पाइपलाइन के जरिए सीधे सप्लाई दी जाती है। जल्द ही अपना घर आश्रम को भी गैस सप्लाई की योजना है।
रोजाना 45 किलो सिंगल-यूज प्लास्टिक हो रहा रिसाइकल
दिसंबर में प्लास्टिक रिसाइकलिंग मशीन लगने के बाद से रोजाना 40–45 किलो सिंगल-यूज प्लास्टिक रिसाइकल किया जा रहा है। इस प्लास्टिक से बाल्टी, मग, ग्लास और टाइल्स जैसे कई उपयोगी सामान तैयार किए जाते हैं, जिससे साफ पानी और स्वच्छ हवा को भी बढ़ावा मिल रहा है।
इस माह शुरू होगा पेपर रिसाइकलिंग प्लांट
सेक्टर-34 के इस प्लांट में पेपर और गत्ते के रिसाइकलिंग यूनिट की शुरुआत 16 जनवरी से होने जा रही है। यहां पुराने कागज से दोबारा क्लीन पेपर बनाया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब 4 अरब पेड़ सिर्फ कागज बनाने के लिए काटे जाते हैं, और कुल वन कटाई का 35 प्रतिशत हिस्सा इसी कारण होता है। यह यूनिट हजारों पेड़ों को बचाने में मदद करेगी।
पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बना सेक्टर-34
सेक्टरवासियों की भागीदारी और वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए यह प्लांट नोएडा में कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण का मॉडल बन चुका है, जो दूसरे सेक्टरों और शहरों के लिए भी प्रेरणा साबित हो सकता है।