गौतम बुद्ध नगर में डॉग बाइट का खतरा बरकरार, दो महीने बाद भी हर घंटे 20 लोग शिकार
जनपद में डॉग बाइट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अगस्त महीने में जहां हर घंटे औसतन 20 लोग कुत्ते के काटने का शिकार हो रहे थे, वहीं दो महीने बाद भी स्थिति में 1 प्रतिशत तक का सुधार नहीं हुआ है। नवंबर महीने में भी जिले में हर घंटे लगभग 20 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर माह में कुल 14,315 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए। इनमें 11,974 मामले स्ट्रे डॉग और 2,341 मामले पालतू कुत्तों के रहे। अक्टूबर में यह आंकड़ा 13,003 था, यानी एक महीने में मामलों में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई। जनवरी से नवंबर तक जिले में डेढ़ लाख से अधिक डॉग बाइट केस सामने आ चुके हैं।
हालांकि सितंबर और अक्टूबर में मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन नवंबर में फिर स्थिति गंभीर हो गई। अगस्त में कुल 14,125 लोगों को कुत्तों ने काटा था, जो खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।
हॉटस्पॉट की संख्या बढ़ी
डिप्टी सीएमओ डॉ. टीकम सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष जिले में डॉग बाइट के 20 हॉटस्पॉट चिह्नित किए गए थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 34 कर दिया गया है। शनिवार को जिला अस्पताल में 400 से अधिक लोगों को एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई गई।
वहीं चीफ फार्मासिस्ट डॉ. गीरेंद्र चौहान के अनुसार, जिले में प्रतिदिन 350 से 400 मरीज रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। जिले में सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल समेत 44 केंद्रों पर एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि गंभीर मामलों में दिया जाने वाला एंटी-रेबीज सीरम केवल जिला अस्पताल में ही उपलब्ध है।
स्ट्रे और पेट डॉग दोनों जिम्मेदार
आंकड़े बताते हैं कि केवल आवारा कुत्ते ही नहीं, बल्कि पालतू कुत्तों के काटने के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। नवंबर में पेट डॉग के मामलों में कोई खास कमी नहीं आई है।
पालतू कुत्तों को लेकर नियम
नगर निगम के नियमों के अनुसार पालतू कुत्ते का रजिस्ट्रेशन कराना, रेबीज समेत सभी जरूरी टीकाकरण कराना अनिवार्य है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते को लीश और हार्नेस के साथ घुमाना जरूरी है।