फॉरेक्स ट्रेडिंग के बहाने आर्किटेक्ट से 64.59 लाख की ठगी

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पीड़ित ने एफडी, बचत खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड रकम निकालकर फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश कर दी रकम

साइबर अपराधियों ने फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर एक आर्किटेक्ट के साथ में 64.59 लाख रुपये ठगी कर ली। पीड़ित से एक महिला ने वॉट्सऐप के माध्यम से संपर्क किया और उन्हें डॉलर में निवेश करने की सलाह दी। साथ ही उन्हें जानकारी दी गई कि इस ट्रेडिंग में विदेशी मुद्राओं को (जैसे डॉलर, यूरो, पाउंड आदि) की खरीद-फरोख्त करना होता है। इसमें निवेशक एक करेंसी को खरीदकर दूसरी करेंसी के मुकाबले उसके दाम बढ़ने या घटने पर मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं। पीड़ित को झांसे में लेने के बाद एक फर्जी वेबसाइट पर अकाउंट चालू कराए गए। पीड़ित ने 30 से अधिक बार में 64 लाख 59 हजार 125 ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए। पीड़ित को मुनाफे नहीं निकालने दिए गए तो उन्होंने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में साइबर थाना पुलिस केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सेक्टर 58 के रजत बिहार निवासी विकास कुमार गोयल (57) ने पुलिस को बताया कि पिछले साल 26 नवंबर कोआश्री अग्रवाल नाम की महिला ने वॉट्सऐप पर संपर्क किया। महिला ने उनके बातचीत करने के बाज डेमो के लिए एक वेबसाइट दिखाई दी और पांच से 20 मिनट की शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में भारी मुनाफे की जानकारी दी। भरोसा होने पर उन्होंने छोटे अमाउंट निवेश किए, बदले में उन्हें मुनाफे की रकम भेजी गई। झांसे में आने के बाद पीड़ित ने अपनी बचत, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड तक तोड़कर कुल 64.59 लाख रुपये ठगों के खाते में ट्रांसफर कर दिए।शुरुआत में वेबसाइट के डैशबोर्ड पर मुनापा बढ़ाता हुआ दिखाई दिया। जिससे उनका भरोसा बढ़ा। हर ट्रांजैक्शन से पहले नया खाता नंबर दिया जाता और 30 मिनट बाद राशि जमा करने को कहा जाता था। जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की तो पीड़ित से 10 से 13 लाख रुपये टैक्स जमा करने की जानकारी दी गई। पीड़ित ने जब और रकम ट्रांसफर करने से इनकार किया तो उसे निवेश की हुई रकम भी न मिलने की धमकी दी गई।

बाद में जांच में सामने आया कि वेबसाइट पर दिखाया गया मुनाफा पूरी तरह फर्जी था और निकासी जानबूझकर रोकी जा रही थी। शिकायत में पीड़ित की ओर से यह भी बताया गया है कि आरोपी ने बेंगलुरु का पता दिया, लेकिन पीड़ित ने कभी इन पतों की पुष्टि नहीं की। ठग बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे थे और आधिकारिक पहचान साझा करने से बचते रहे। मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम थाने में आईटी एक्ट और संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने संबंधित बैंक खातों को फ्रीज करने और रकम की रिकवरी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी भावनाओं और लालच का फायदा उठाते हैं। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। इस मामले में जांच जारी है और पुलिस जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है।

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