ड्राइविंग लाइसेंस का निजीकरण बना चुनौती, दो साल में आधे रह गए आवेदन
निजी टेस्टिंग सेंटर शुरू होते ही गिरा लाइसेंस बनाने का ग्राफ, 2025 में सख्ती के बाद दिखने लगा सुधार
जनपद में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या में बीते दो वर्षों के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े साफ तौर पर इशारा कर रहे हैं कि जैसे ही ड्राइविंग लाइसेंस की टेस्टिंग प्रक्रिया निजी हाथों में सौंपी गई, वैसे ही लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या लगभग आधी रह गई। यह गिरावट न सिर्फ आम लोगों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि निजी टेस्टिंग सेंटरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही है।
चार साल के आंकड़ों ने खोली तस्वीर
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में हर महीने औसतन 1463 ड्राइविंग लाइसेंस बने, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 2017 प्रति माह रहा। इसके उलट निजीकरण से पहले के वर्षों में स्थिति कहीं बेहतर थी। वर्ष 2023 में प्रति माह औसतन 4017 और 2022 में 3741 ड्राइविंग लाइसेंस बनाए गए थे। यानी निजीकरण के बाद लाइसेंस बनने की रफ्तार में भारी गिरावट आई है।
निजीकरण से पहले बेहतर था सिस्टम
वर्ष 2024 से ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की पूरी प्रक्रिया निजी कंपनियों को सौंप दी गई। इससे पहले लाइसेंस से जुड़ा हर कार्य परिवहन विभाग के नियंत्रण में था। आंकड़े बताते हैं कि 2023 में कुल 48,213 और 2022 में 44,892 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए थे। कोविड के असर वाले वर्ष 2021 में 28,271 और उससे पहले 2020 में 32,195 लोगों को लाइसेंस मिला था। उस समय टेस्टिंग प्रक्रिया को आम लोगों के लिए अधिक सरल और पारदर्शी माना जाता था।
निजी टेस्टिंग सेंटरों पर आरोप
निजीकरण के बाद ड्राइविंग टेस्ट की जिम्मेदारी निजी टेस्टिंग सेंटरों को मिलने से शिकायतों में इजाफा हुआ। आवेदकों का आरोप है कि कई सेंटरों पर मनमानी की जाती है, बिना ठोस कारण टेस्ट में फेल कर दिया जाता है और कुछ मामलों में अवैध रूप से अतिरिक्त पैसे की मांग भी की जाती है। इन्हीं वजहों को 2024 में लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या में आई करीब 50 प्रतिशत गिरावट का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
सख्ती के बाद दिखने लगा असर
हालांकि 2025 की शुरुआत से परिवहन विभाग ने निजी टेस्टिंग सेंटरों पर निगरानी कड़ी कर दी है। नियमित निरीक्षण, अचानक जांच और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का असर अब नजर आने लगा है। भले ही आंकड़े अभी 2022-23 के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन 2024 की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है।
अधिकारियों की राय
एआरटीओ (प्रशासन) नोएडा नंद कुमार का कहना है कि यदि निजी टेस्टिंग सेंटरों पर सख्ती और पारदर्शिता इसी तरह बनी रही, तो आने वाले समय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है। मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि निजीकरण के बाद आई गिरावट पर काबू पाने के लिए निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है।