दिल्ली में सोलर क्रांति की शुरुआत: DERC की वर्चुअल नेट मीटरिंग से अब उपभोक्ता आपस में बेच सकेंगे बिजली
Mediawali News, नई दिल्ली।
राजधानी दिल्ली में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। Delhi Electricity Regulatory Commission (डीईआरसी) ने वर्चुअल नेट मीटरिंग की नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन दिशा-निर्देशों के तहत अब उपभोक्ता आपस में सीधे बिजली की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे। नियामक आयोग ने दिल्ली की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में 1000-1000 उपभोक्ताओं को इस व्यवस्था से जोड़ें।
क्या है वर्चुअल नेट मीटरिंग?
वर्चुअल नेट मीटरिंग पारंपरिक नेट मीटरिंग से एक कदम आगे की व्यवस्था है। सामान्य नेट मीटरिंग में उपभोक्ता अपने घर या बिल्डिंग की छत पर लगे सोलर पैनल से बनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज सकता है और महीने के अंत में उसका समायोजन बिल में किया जाता है।
नई व्यवस्था के तहत एक ही स्थान पर स्थापित सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली को कई उपभोक्ताओं के बीच उनके स्वीकृत लोड के अनुसार बांटा जा सकेगा, भले ही उनके मीटर अलग-अलग हों।
उदाहरण के तौर पर, किसी सोसाइटी के निवासी मिलकर एक कॉमन सोलर प्लांट लगाकर उससे उत्पन्न बिजली का लाभ साझा कर सकते हैं।
पीयर-टू-पीयर एनर्जी ट्रेडिंग को मंजूरी
डीईआरसी की गाइडलाइंस में उपभोक्ताओं को पीयर-टू-पीयर (P2P) ऊर्जा व्यापार की भी अनुमति दी गई है। इसके तहत:
- सोलर प्लांट और नेट मीटरिंग सुविधा वाले उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली बेच सकेंगे।
- बिजली खरीदने वाले उपभोक्ता के पास स्मार्ट मीटर होना अनिवार्य होगा।
- मोबाइल ऐप के माध्यम से बिजली की दर तय की जा सकेगी।
- लेनदेन पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगा।
डिस्कॉम को मिला लक्ष्य
राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियां –
- BSES Rajdhani Power Limited
- Tata Power Delhi Distribution Limited
- New Delhi Municipal Council
- को अपने-अपने क्षेत्र में कम से कम 1000 उपभोक्ताओं को इस योजना से जोड़ना होगा।
उपभोक्ताओं और दिल्ली को संभावित लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल से सोलर ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिल सकती है। अतिरिक्त सोलर बिजली बेचकर उपभोक्ता आय भी अर्जित कर सकेंगे। इसके अलावा, हरित ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
डीईआरसी का यह कदम दिल्ली को स्मार्ट और ग्रीन एनर्जी मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में इस योजना के प्रभाव का आकलन किया जाएगा।