स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस, माघ मेला प्राधिकरण की सख्त चेतावनी; शंकराचार्य की बढ़ी मुश्किलें

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प्रयागराज।
ज्योतिष मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज माघ मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो मेला क्षेत्र में उनका प्रवेश हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। यह नोटिस 18 जनवरी का बताया जा रहा है, जिसमें मौनी अमावस्या के दिन नियमों के उल्लंघन और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया है।

शिविर पर चस्पा मिला नोटिस

प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से जारी यह नोटिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पीछे वाले हिस्से पर चस्पा पाया गया। मेला प्रशासन के कर्मचारियों ने शिविर में आकर इसकी जानकारी दी। बताया गया कि जब तक शंकराचार्य को नोटिस की जानकारी मिली, तब तक तीन दिन बीत चुके थे। नोटिस अधिकृत हस्ताक्षरी के नाम से जारी किया गया है और इसमें 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया था।

नोटिस में क्या हैं आरोप?

नोटिस के मुताबिक, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आपात परिस्थितियों के लिए आरक्षित त्रिवेणी पांटून पुल नंबर-2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुए बिना अनुमति संगम अपर मार्ग की ओर बग्घी से जाने का प्रयास किया।
नोटिस में कहा गया है कि उस समय संगम क्षेत्र में भारी भीड़ थी और प्रशासन द्वारा बार-बार घोषणा की जा रही थी कि किसी भी प्रकार के वाहन का प्रवेश प्रतिबंधित है और केवल पैदल आवागमन की अनुमति है। इसके बावजूद वाहन निषिद्ध क्षेत्र में जाने से भीड़ प्रबंधन प्रभावित हुआ और भगदड़ की आशंका पैदा हुई।

प्रशासन का कहना है कि लाखों स्नानार्थियों की मौजूदगी के बीच इस तरह का कदम जन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता था। मना करने पर विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हुई, जिससे मेला व्यवस्था बाधित हुई।

शंकराचार्य पद को लेकर भी आपत्ति

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा स्वयं को शंकराचार्य बताकर बोर्ड और संकेत लगाए गए हैं, जबकि इस विषय पर मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर रोक भी लगी हुई है। प्रशासन ने इसे सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में बताया है।

स्थायी प्रतिबंध की चेतावनी

मेला प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि 24 घंटे के भीतर यह बताया जाए कि क्यों न उनकी संस्था को दी गई भूमि और सुविधाएं निरस्त कर दी जाएं और उन्हें सदैव के लिए मेला क्षेत्र में प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए। तय समय में जवाब न मिलने पर एकतरफा निर्णय लेने की बात कही गई है।

अविमुक्तेश्वरानंद की पलटवार

मेला प्रशासन के नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से भी कानूनी नोटिस जारी किया गया है। उनके अधिवक्ता अंजनी कुमार मिश्र ने मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब मांगा है। इसमें कहा गया है कि शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में प्रशासन का हस्तक्षेप अदालत की अवमानना है। नोटिस वापस न लेने पर मानहानि और अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पोस्टर जारी कर गृह सचिव, मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी पर संगम स्नान से रोकने और बटुकों के साथ मारपीट का आरोप लगाया है। उन्होंने अपनी हत्या की साजिश और पांच घंटे तक अगवा किए जाने का दावा भी किया है।

फिलहाल, मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच यह टकराव और तेज होता दिख रहा है, और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे प्रशासन और अदालत क्या रुख अपनाती है

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