निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेन्द्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को अंतिम लंबित मामले में भी बरी कर दिया और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि एक ही साक्ष्यों के आधार पर बारह मामलों में बरी और एक में दोषसिद्ध ठहराना “न्याय की विडंबना” होगा।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और विक्रम नाथ की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा, “याचिकाकर्ता को तत्काल रिहा किया जाए, यदि किसी अन्य मामले में वांछित न हो।” अदालत ने जेल अधीक्षक को इस आदेश की जानकारी तुरंत देने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
पीठ ने 3 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान ही यह संकेत दिया था कि यदि एक ही साक्ष्यों पर बारह मामलों में आरोपी को बरी किया गया है, तो एकमात्र बचे हुए मामले में दोषसिद्धि कायम रखना “अनुचित” होगा। अदालत ने माना कि कोली की सजा केवल उसके कथित इकबालिया बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी पर आधारित थी — वही साक्ष्य जिन पर अन्य मामलों में उसे बरी किया जा चुका है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी ही पूर्ववर्ती निर्णय को curative petition के माध्यम से पलटने का एक दुर्लभ उदाहरण है। Curative petition न्याय की वह अंतिम गुहार होती है जो केवल असाधारण परिस्थितियों में स्वीकार की जाती है, जैसे न्यायिक पक्षपात या प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन की स्थिति
निठारी हत्याकांड 2007 में तब उजागर हुआ जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित एक घर के पीछे नाले से बच्चों के कंकाल और हड्डियाँ बरामद हुईं। इस घर में सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक के रूप में कार्यरत था, जबकि घर के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर थे।
सीबीआई की जांच में कोली पर आरोप लगा कि वह बच्चों को फुसलाकर घर लाता था, उनका यौन शोषण कर हत्या कर देता था और शवों के टुकड़े कर नाले में फेंक देता था। कोली पर नरभक्षण (कैनिबलिज़्म) के भी आरोप लगे थे।
2005 से 2007 के बीच इस सिलसिले में कुल 16 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कोली को 13 मामलों में दोषी ठहराया था, जबकि पंधेर को दो में सज़ा दी गई थी। बाद में पंधेर सभी मामलों में बरी हो गए।