एलपीजी की कमी से बढ़ी इंडक्शन चूल्हों की मांग, क्या बढ़ेगा बिजली संकट? सरकार ने दिया बड़ा जवाब
Mediawali news
पश्चिम एशिया में जारी Iran–Israel War का असर अब भारत के घरेलू जीवन पर भी दिखाई देने लगा है। देश के कई शहरों और गांवों से एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में कई परिवारों ने गैस की जगह बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि अगर बड़ी संख्या में लोग बिजली से खाना बनाने लगेंगे तो क्या देश में बिजली की कमी हो सकती है।
इस चिंता पर केंद्र सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल बिजली को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्रीय बिजली और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि भारत के पास मांग से कहीं ज्यादा बिजली बनाने की क्षमता मौजूद है।
मंत्री के अनुसार इस समय देश में सभी तरह के बिजली घरों- थर्मल, हाइड्रो, सोलर और अन्य स्रोतों—को मिलाकर कुल स्थापित उत्पादन क्षमता लगभग 5.24 लाख मेगावाट है। वहीं 12 मार्च को देश में बिजली की अधिकतम मांग करीब 2.36 लाख मेगावाट दर्ज की गई। इसका मतलब है कि भारत के पास जरूरत से लगभग दोगुनी बिजली उत्पादन क्षमता मौजूद है।
उन्होंने बताया कि बिजली उत्पादन लगातार बढ़ाया जा रहा है। पहले देश का ज्यादा ध्यान कोयले से बनने वाली थर्मल बिजली पर था, लेकिन अब सरकार का जोर नवीकरणीय ऊर्जा, खासकर सौर ऊर्जा पर है। हालांकि सौर और पवन ऊर्जा हर समय उपलब्ध नहीं रहती, इसलिए सरकार परमाणु ऊर्जा को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है। वर्तमान में देश में परमाणु ऊर्जा की क्षमता लगभग 8 गीगावाट है और कई नई परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।
सरकार की योजना है कि आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन को और मजबूत किया जाए ताकि बढ़ती मांग को आसानी से पूरा किया जा सके। इसके अलावा जल विद्युत परियोजनाओं पर भी काम तेज किया जा रहा है। खासकर जम्मू-कश्मीर में सिंधु, झेलम और चेनाब जैसी नदियों पर नए हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की कमी के कारण अगर लोग अस्थायी रूप से इंडक्शन या इलेक्ट्रिक चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ाते भी हैं, तब भी देश की बिजली व्यवस्था इसे संभाल सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े निवेश किए हैं।
सरकार का यह भी कहना है कि स्मार्ट मीटर, बेहतर ग्रिड सिस्टम और नई ऊर्जा परियोजनाओं की वजह से बिजली की आपूर्ति पहले की तुलना में ज्यादा स्थिर हो गई है। आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा के विस्तार से बिजली उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, गैस की कमी के कारण भले ही लोग अस्थायी रूप से बिजली से खाना बनाने की ओर बढ़ रहे हों, लेकिन सरकार का दावा है कि देश में फिलहाल बिजली संकट की कोई स्थिति नहीं है। उल्टा, भारत अपनी बिजली क्षमता को लगातार बढ़ाकर भविष्य की जरूरतों के लिए तैयारी कर रहा है।