दिल्ली सरकार ने 121 मोहल्ला क्लीनिक बंद करने का आदेश दिया; यूनियन का दावा—हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में
दिल्ली सरकार ने हाल ही में 121 मोहल्ला क्लीनिकों को बंद करने का आदेश जारी किया है, जिससे इन क्लीनिकों से जुड़े हजारों कर्मचारियों की नौकरियां संकट में पड़ गई हैं। यूनियन का कहना है कि इस कदम से डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों और मल्टी-टास्किंग स्टाफ सहित सैकड़ों कर्मचारियों की रोज़गार प्रभावित होगी। दिल्ली सरकार ने पहले भी 31 मोहल्ला क्लीनिकों को बंद किया था जो पोर्टा कैबिन और किराए की जगहों पर चल रहे थे, और कर्मचारियों को बिना सूचना दिए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इससे कर्मचारियों में चिंता का माहौल बना हुआ है। हालांकि, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विश्वास दिया था कि मौजूदा कर्मचारी नए स्वास्थ्य ढांचे में महत्व के आधार पर शामिल किए जाएंगे। लेकिन यूनियन का कहना है कि इस विश्वास के बावजूद कर्मचारियों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिकों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदलने की योजना बनाई है, लेकिन इन नए केंद्रों की स्थापना में देरी हो रही है, जिससे मौजूदा कर्मचारियों की स्थिति और भी जटिल हो गई है। यूनियन ने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों की सेवाओं को स्थायी किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी है। आप पार्टी ने सरकार के इस कदम को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ा झटका बताया है, जबकि भाजपा ने इसे स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने की दिशा में एक आवश्यक कदम बताया है।
कुल मिलाकर, दिल्ली सरकार के इस निर्णय से मोहल्ला क्लीनिकों से जुड़े कर्मचारियों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है, और इस मामले में जल्द समाधान की आवश्यकता है।