पुतिन की भारत यात्रा से पहले यूरोपीय देशों का लेटर विवाद, भारत ने कहा— “अनुचित और असामान्य कदम”
पुतिन के भारत दौरे से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस हफ्ते दो दिन की भारत यात्रा पर आने वाले हैं। इससे पहले फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के राजनयिकों ने एक भारतीय अखबार में लेख लिखकर पुतिन की आलोचना की। लेख में रूस पर शांति प्रयासों को रोकने का आरोप लगाया गया था।
भारत ने इस लेख पर नाराजगी जताते हुए इसे “असामान्य और अनुचित राजनयिक व्यवहार” बताया।
भारत–रूस के बीच होंगे कई अहम समझौते
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक पुतिन की यात्रा के दौरान कई क्षेत्रों में समझौते हो सकते हैं:
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व्यापार
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कृषि
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स्वास्थ्य
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संस्कृति
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श्रमिक गतिशीलता (Mobility Agreement)
मोबिलिटी समझौते से भारतीय कामगारों के लिए रूस में नौकरी पाने की प्रक्रिया और सरल हो जाएगी। इसमें भर्ती प्रक्रिया और शर्तों का भी उल्लेख होगा।
व्यापार असंतुलन पर होगी बड़ी चर्चा
वर्तमान स्थिति:
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रूस से भारत का आयात: 65 अरब डॉलर
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भारत से रूस को निर्यात: लगभग 5 अरब डॉलर
भारत इस असंतुलन को कम करना चाहता है। सरकार के अनुसार भारत औषधियां, कृषि उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड और उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात बढ़ाने पर जोर देगा।
भारत–रूस रक्षा सहयोग पर होगा फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच बैठक में:
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रक्षा सहयोग
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संयुक्त परियोजनाएं
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सैन्य तकनीकी समझौते
इन पर गहन चर्चा की उम्मीद है। वार्षिक शिखर बैठक से कई बड़े फैसले निकल सकते हैं।
यूक्रेन युद्ध पर भारत की स्पष्ट राय
बैठक में यूक्रेन युद्ध का मुद्दा भी उठेगा। भारत का रुख एक बार फिर साफ है:
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युद्ध का अंत बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है।
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भारत किसी भी ऐसे शांति प्रयास का समर्थन करेगा जो संवाद और युद्ध विराम पर आधारित हो।
यूरोपीय देशों के लेख पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजदूतों द्वारा लिखे गए लेख पर भारतीय अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। लेख में पुतिन पर युद्ध रोकने के प्रयासों को बाधित करने का आरोप लगाया गया था।
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के लेख राजनयिक परंपरा के खिलाफ हैं और यह तरीका भारत की विदेश नीति में हस्तक्षेप जैसा है।
उर्वरक, तेल और FTA पर भी होगी बातचीत
दोनों देश इन क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे:
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उर्वरक सप्लाई
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अकादमिक व सांस्कृतिक आदान-प्रदान
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कृषि साझेदारी
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यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
रूस हर साल भारत को 3–4 मिलियन टन उर्वरक देता है।
रूसी तेल आयात में कमी — भारत ने बताई वजह
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद कम की है। भारत का कहना है:
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यह निर्णय पूरी तरह वैश्विक बाजार की कीमतों और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
पुतिन की भारत यात्रा रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम है। यूरोपीय देशों के लेख ने यात्रा से पहले कूटनीतिक तनाव जरूर बढ़ाया है, लेकिन भारत ने यह साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और भारत–रूस सहयोग अपने हितों के आधार पर आगे बढ़ता रहेगा।